इसके अलावा अवैध रूप से कारोबार कर रहे छह कारोबारी दुकानें छोड़ कर भाग खड़े हुए। प्रशासन ने दुकानों का पूरा सामान कब्जे में ले लिया है। इन कारोबारियों पर पर्यटन विभाग की ओर से जारी पंजीकृत संख्या के अलावा फर्जी नंबर यूज करने पर कार्रवाई की गई है।
वहीं कारोबारियों की एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया जा रहा है कि एसोसिएशन फर्जी कारोबारियों पर नजर क्यों नहीं रख रही है? इधर, प्रशासन की कार्रवाई से कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
मनाली के वशिष्ठ, बांघ, पलचान और कोठी के आसपास प्रशासन को सूचना मिली थी कि कई कारोबारी फर्जी दुकानें लगा कर यहां आने वाले सैलानियों को ठग रहे हैं। वहीं ये फर्जी कारोबारी सैलानियों से गालीगलौज और हाथापाई तक करने से भी परहेज नहीं करते।
वहीं ऐसे ही फर्जी कारोबारी के खिलाफ रोहतांग का परमिट 2500 में बेचने का मामला सामने आ चुका है। इस आधार पर बुधवार को प्रशासन ने उक्त क्षेत्रों में छापामारी की। पर्यटन विभाग ने गर्म ड्रेस को रेंट पर देने का सरकारी रेट 250 रुपये तय किया है, लेकिन फर्जी कारोबारी ड्रेस तो 50 रुपये में दे रहे हैं, लेकिन इसके एवज में अन्य पैकेज के नाम पर सैलानियों को ठग रहे हैं।
वहीं सैलानी अगर पैकेज लेने से मना कर दें तो उनके साथ अभद्र व्यवहार करने से भी परहेज नहीं करते हैं और सैलानियों को जबरन पैकेज थमा देते हैं।
इधर, इस बारे में एसडीएम मनाली ज्योति राणा ने बताया कि उनकी टीम ने बुधवार को इन क्षेत्रों में छापामारी की। तीन दुकानों को सील किया गया है और 27 को नोटिस जारी किए गए है। इसके अलावा छह फर्जी कारोबारी मौके पर से दुकानें छोड़ कर भाग खड़े हुए हैं। जिनका पूरा सामान कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी नोटिस जारी किया जा रहा है।
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एनजीटी के शिकंजे का मुख्य कारण भी लूट ही था
मनाली (कुल्लू)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के कड़े फैसले के पीछे भी सैलानियों से अभद्र व्यवहार और खाद्य वस्तुओं से लेकर अन्य सामान के नाम पर लूट मुख्य कारण रहा है। एनजीटी की टीम ने भी मौके पर पहुंच कर सैलानियों से हो रही लूट खसूट देखी है। एनजीटी की सख्ती के पीछे यह भी एक बड़ा कारण है, लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी यहां के कारोबारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।