संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर/कुल्लू। बरसात का मौसम शुरू होते ही जिला लाहौल-स्पीति और कुल्लू के नदी-नालों का जलस्तर एकाएक बढ़ना शुरू हो गया है। लाहौल में चंद्राभाग नदी के साथ नदी-नाले उफान पर हैं।
तीन से चार दिनों से लाहौल की मयाड़ घाटी के नालों में बाढ़ जैसे हालत बने हैं। मयाड़ घाटी के घोट नाला, शकोली नाला और चांगुट के भिंगी नाले के साथ शांशा नाले में शनिवार को बाढ़ आने से अफरातफरी मच गई। हालांकि इसमें किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। शांशा नाले में बने बीआरओ के बैली ब्रिज को यातायात के लिए बहाल कर दिया है।
बाढ़ के कारण पुल के निचले हिस्से को पहुंचे नुकसान की सीमा सड़क संगठन ने मरम्मत शुरू कर दी है। इसके अलावा बाढ़ का पानी कुछ खेतों में घुसने के बाद उदयपुर प्रशासन ने राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि पिछले साल भी जनजातीय क्षेत्र लाहौल में भी जुलाई महीने में तेज बारिश के कारण जगह-जगह बादल फटने से करोड़ों को नुकसान हो गया था। सब्जी के साथ मटर व सेब की फसल तबाह हो गई थी, लेकिन इस बार घाटी में बारिश नहीं होने से सूखे जैसे हालात बने और तापमान एकाएक बढ़ गया है। गलेश्यिर पिघलने से नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने लगा है।
कई जगहों पर बाढ़ भी आ रही है। उपमंडलाधिकारी उदयपुर निशांत तोमर ने बताया कि घाटी के नालों का जलस्तर एकाएक बढ़ रहा है। हालांकि किसी तरह का कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। पुलिस अधीक्षक लाहौल-स्पीति मानव वर्मा ने कहा कि लाहौल केे सभी नदी-नालों का स्तर बढ़ा है और बहाव तेज हो गया है। उन्होंने स्थानीय जनता के साथ सैलानियों को बरसात के मौसम में सतर्क रहने और नदी-नालों की तरफ न जाने की हिदायत दी है। घाटी के नदी-नालों पर बने पुलों से दूर रहने की भी चेतावनी दी है। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल शबरीश वाचली ने कहा कि शांशा नाले में बाढ़ आने से उनके पुल को आशिंक नुकसान हुआ है। पुल से ट्रैफिक बहाल हो गया और पुल का मरम्मत कार्य भी आरंभ कर दिया है।