देवसदन में जुटे देश और प्रदेश के साहित्यकार
कुल्लू में साहित्य उत्सव 2025 का हुआ आगाज
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। इतिहास का एक अपना लंबा कालखंड होता है, जिसमें अलग-अलग साम्राज्य और भाषाओं का वर्चस्व रहता है। इसलिए यह हमारे जानने से परे हैं। बावजूद इसके निश्चितता की पड़ताल करना आवश्यक होता है।
साहित्य बहुत सी परंपराओं का समांतर, सैकड़ों साल चलने वाला, कभी तेज और कभी धीमी गति, अलग-अलग कारकों से प्रभावित होता है। भक्ति आंदोलन लोगों को आंदोलित करती परंपराओं का खूबसूरत परवाह है, पर आंदोलन नहीं है। इसे परंपरा के रूप में ही देखें। यह बात भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर ने कही।
भाषा-संस्कृति विभाग व हिमतरु प्रकाशन समिति के संयुक्त आयोजन कुल्लू साहित्य उत्सव-2025 का शुभारंभ ढालपुर स्थित देवसदन के सभागार में भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर ने ऑनलाइन माध्यम से किया। कुल्लू साहित्य उत्सव-2025 के शुभारंभ पर सचिव राकेश कंवर कहा कि आयोजन का प्रमुख विषय भक्ति काल में सूफी एवं निर्गुण धारा रखा गया है, जो रोचक एवं गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास पर नजर डालें तो यह एक ऐसा वृक्ष है, जिसकी जड़, तना एवं शाखाएं क्या हैं। यह हमारे जानने से परे हैं, लेकिन इसे पढ़ते समय हमें बचते रहने की आवश्यकता है। इतिहास की सत्यता पूरी तरह से सिद्ध नहीं हो पाती। प्रमुख वक्ता डॉ. सुभाष राय ने भक्ति आंदोलन और दक्षिण में स्त्री कवयित्रियां अक्का महादेवी और आडांल के विशेष संदर्भ में वक्तव्य दिया। डॉ. संजू पॉल ने कबीर के चिंतन में जहान की चिंता विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। अतिरिक्त जिला भाषा अधिकारी कुल्लू प्रोमिला गुलेरिया, वरिष्ठ लेखक गंगा राम राजी, रूपेश्वरी शर्मा, डॉ. रेखा वशिष्ठ, डॉ. निरंजन देव शर्मा मौजूद रहे।