...ग्राउंड रिपोर्ट
तीन किलोमीटर सड़क के अभाव में चार किलोमीटर तक पीठ पर ढोने पड़ते हैं मरीज
संयुक्त निरीक्षणों के बावजूद शुरू नहीं हो पाया निर्माण
रमेश धामी
सैंज (कुल्लू)। घाटी के दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ने वाली सैंज-फगला वाया मोभा-रैला सड़क पिछले 20 वर्षों से फाइलों में कैद है। वर्षों बीत जाने के बाद भी यह सड़क रैला गांव तक नहीं पहुंच पाई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का विकास संबंधी सपना अधूरा बना हुआ है। सैंज से फगला तक का हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन फगला से आगे मोभा होते हुए रैला तक जाने वाली लगभग तीन किलोमीटर का सड़क आज भी नहीं बन पाई है। हालांकि, बार-बार किए संयुक्त निरीक्षणों के बावजूद धरातल पर काम आगे नहीं बढ़ पाया है।
स्थानीय निवासी मोहर सिंह, कैलाश, हरभजन, युगल, टेकसिंह, गौतम, दीपक और बहादर सिंह ने सरकार, प्रशासन, लोक निर्माण और वन विभाग पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों, विशेषकर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं किया गया, तो वे आगामी समय में उग्र आंदोलन करने पर विवश होंगे।
उधर, लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता मेघ सिंह ने बताया कि सैंज-फगला वाया मोभा-रैला सड़क निर्माण की सभी विभागीय औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। वन विभाग से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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रैला पंचायत की यह एकमात्र सड़क पिछले 20 वर्षों से तैयार नहीं हुई है। लोक निर्माण विभाग की लेटलतीफी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। -हरभजन सिंह
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सड़क न होने से ग्रामीणों को मजबूरन बीमारों और गर्भवती महिलाओं को पीठ में उठाकर चार किलोमीटर दूर सैंज पहुंचाना पड़ता है। -मोहर सिंह
ग्राउंड रिपोर्ट--मोहर सिंह नेगी स्थानीय निवासी।-संवाद