ढालपुर में आयोजित श्रीराम कथा में उपस्थित श्रद्धालु। -जागरूक पाठक
कुल्लू। श्रीराम कथा के दौरान साध्वी गरिमा भारती ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम ऋषि विश्वामित्र के साथ वन प्रांत में गए और ताड़का, सुबाहु तथा मारीच जैसे असुरों का संहार किया, तो यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए गहरा संदेश भी है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में हमारा मन एक वन के समान है, जबकि ताड़का, सुबाहु और मारीच जैसे असुर हमारे भीतर मौजूद लोभ, मोह, अहंकार और अन्य विकारों के प्रतीक हैं। जिस प्रकार प्रभु श्रीराम के वन में आगमन से आसुरी शक्तियों का अंत हुआ और शांति की स्थापना हुई, उसी प्रकार जब मनुष्य के अंतर्मन में श्रीराम का प्राकट्य होता है तो नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित होता है तथा जीवन में ज्ञान, शांति और सद्भाव का संचार होता है। साध्वी गरिमा भारती ने कहा कि इसके लिए आवश्यक है कि व्यक्ति किसी सद्गुरु की शरण में जाकर आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से अपने भीतर श्रीराम के आदर्शों को जागृत करे।
उन्होंने जिला मुख्यालय ढालपुर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। साथ ही हिमाचल प्रदेश घूमने आने वाले पर्यटकों से सभी देवी-देवताओं के स्थलों की पवित्रता, गरिमा और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
कथा के दौरान स्वामी विनयानंद और महात्मा नरेश ने भी प्रभु श्रीराम की महिमा का गुणगान किया तथा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किए।