कुल्लू। ईरान-अमेरिका युद्ध से कच्चे तेल की सप्लाई चैन बाधित होने से तारकोल महंगा हो गया है। करीब दोगुना महंगा होने से तारकोल नहीं आ रहा है।
युद्ध से पहले तारकोल का रेट 55,000 मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 90,000 रुपये मीट्रिक टन हो गया है। इससे प्रदेशभर में सड़कों की टारिंग का काम प्रभावित हो गया है। ऐसे में एनएच और लोक निर्माण विभाग तय लक्ष्य के हिसाब से सड़कों की टारिंग का काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं। मुश्किल से 15 से 20 दिन बाद तारकोल का टैंकर पहुंच रहा है।
हालांकि, कुछ दिन पहले स्थिति सामान्य हो गई थी लेकिन होर्मुज में फिर से बिगड़े हालत से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो गई है।
युद्ध से पहले प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों की टारिंग के लिए लगाए टेंडरों के रेट 55 रुपये प्रति किलाे के हिसाब से भरे गए थे लेकिन अब तारकोल 90 रुपये प्रति किलाे होने से सड़कों की टारिंग का काम नहीं हो पा रहा है।
रेट बढ़ने के बाद ठेकेदार भी किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। जिला कुल्लू में औट-बंजार-सैंज हाईवे-305 की टारिंग का काम अप्रैल से हो रहा है लेकिन तारकोल की सप्लाई में भारी कमी होने से टारिंग का काम कछुआ गति से हो रहा है। बंजार से बठाहड़ सड़क की टारिंग का काम 15 से 20 दिनों से बंद पड़ा है। वहीं, राणाबाग-बालू सड़क की टारिंग भी पूरी नहीं हो पाई है। कई ऐसी सड़कें हैं जिनका टेंडर हो गया है लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध से तारकोल महंगा होने से टारिंग नहीं की जा रही है। लोक निर्माण विभाग कुल्लू के अधिशासी अभियंता बीसी नेगी ने कहा कि तारकोल महंगा होने से टारिंग का काम प्रभावित हो रहा है।