कुल्लू। लाहौल-स्पीति के जाहलमा नाले पर पुल के क्षतिग्रस्त होने और लगातार बारिश के कारण पांगी घाटी के मटर उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। समय पर फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पाने और तुड़ाई प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में करीब 70 फीसदी तक मटर की फसल खराब हो गई है। अब पुल बहाल होने के बाद किसानों को मटर के केवल 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक दाम मिल रहे हैं।
पांगी की कुमार, हिलौर, शूण, सहाली, करयास और हुडान पंचायतों के किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। किसानों का कहना है कि दो माह पहले मटर के 80 रुपये प्रति किलो तक दाम मिल रहे थे। जाहलमा पुल क्षतिग्रस्त होने से बड़े वाहनों के लिए सड़क बाधित हो गई।
इससे समय पर फसल कुल्लू के भुंतर और अन्य मंडियों तक नहीं पहुंच सकी। अब कीमतों में भारी गिरावट आ गई है। लगातार बारिश के कारण खेतों में समय पर मटर की तुड़ाई भी नहीं हो सकी, जिससे फसल खराब हो गई। किसानों में भाग सिंह, देवीशरण, अमर नाथ, सुरेंद्र कुमार, सोभिया राम, प्रेम सिंह और जीत सिंह ने बताया कि उन्हें मटर के कम दाम मिल रहे हैं। इससे नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कृषि विभाग के एसएमएस नरेश नायक ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के कारण किसान समय पर खेतों से मटर की तुड़ाई नहीं कर पाए। इस वर्ष पांगी में मटर की अच्छी पैदावार हुई थी। सीजन की शुरुआत में किसानों को बेहतर दाम मिले, लेकिन बाद में बाजार भाव में गिरावट आ गई। उन्होंने बताया कि इस बार पांगी की 19 पंचायतों के किसानों को कृषि विभाग की ओर से सब्सिडी पर मटर का बीज उपलब्ध करवाया गया था। संवाद