मनाली के समीप धुदी में जमा पानी का झरना।-संवाद
शन्यू से नीचे जाने लगा शीत मरुस्थल का पारा, पड़ रही कड़ाके की ठंड
राशन, लकड़ी और आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करने में जुटे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिले में तापमान माइनस से नीचे पहुंचने लगा है। इससे नदी-नालों के साथ पेयजल स्रोत भी जमने लगे हैं। सर्दियों के मौसम को देखते हुए लोग भी आवश्यक सामग्री के भंडारण में जुट गए हैं।
बर्फबारी होने के बाद आवश्यक सामग्री की किल्लत न आए, इसके लिए लोग तीन-चार महीनों के लिए राशन, लकड़ी और अन्य आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर रहे हैं।
हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में ठंड बढ़ गई है। सुबह और रात के समय तापमान शून्य से नीचे होने के कारण नदी-नालों के किनारे जमने लगे हैं। सर्दी की दस्तक के साथ लोगों ने ठंड के मौसम के लिए खाद्य सामग्री और लकड़ी का भंडारण शुरू कर दिया है। फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन के लकड़ी और उपभोक्ता भंडार डिपो से राशन खरीदने का क्रम जारी है। पानी जमने से शिंकुला, बारालाचा और कुंजम दर्रे की ओर सफर अब जोखिम भरा हो गया है। जिला प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए सुबह 10.00 बजे के बाद ही ऊंचाई वाले मार्गों पर वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी है। उधर, उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि सर्दियों के लिए पर्याप्त खाद्य सामग्री और ईंधन का भंडारण कर लिया गया है। लोग भी अपने स्तर पर जरूरी सामान और बालन लकड़ी स्टोर कर रहे हैं ताकि भारी बर्फबारी के बीच कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड और जमाव के बावजूद अटल टनल और कुंजम दर्रे होकर वाहनों की आवाजाही फिलहाल सुचारू बनी हुई है।