ग्लेशियर की 15 से 20 फीट मोटी परत पावर चेन मशीन से काट रहे 15 से 20 श्रमिक
सिंचाई कूहल का मुहाना ढूंढने के बाद टेलंगबे गांव में खेतों तक पहुंचाया जाएगा पानी
एक सप्ताह से चल रहा बर्फ का पहाड़ काटने का काम, अभी तीन-चार दिन और लगेंगे
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल के नाम से मशहूर लाहौल घाटी के लोग पानी के लिए बर्फ के पहाड़ से जंग लड़ रहे हैं। ग्लेशियर की 15 से 20 फीट मोटी परत को पावर चेन मशीन से काटकर कूहल का मुहाना ढूंढा जा रहा है। एक सप्ताह से 15 से 20 श्रमिक इस काम में लगे हैं।
कूहल का मुहाना ढूंढने के बाद इसके जरिये खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके बाद खेत तर किए जाएंगे। लाहौल घाटी में अनाज और अन्य सब्जियां उगाने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सिंचाई के लिए पानी को लेकर बर्फ के पहाड़ से जद्दोजहद करते लोगों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो में टेलंगबे गांव के लोग और श्रमिक सिंचाई कूहल से पानी ले जाने के लिए ग्लेशियर से जंग लड़ते नजर आ रहे हैं।दरअसल, घाटी में बहुत कम बारिश होती है। ऐसे में सिंचाई पर ही फसलों का उत्पादन निर्भर करता है। बताया जा रहा है कि लोट नाला के मुहाने से टेलंगबे गांव के लिए सिंचाई कूहल है। यहां से सिंचाई के लिए पानी ले जाने के लिए एक सप्ताह से श्रमिक संघर्ष कर रहे हैं।
लाहौल की रानिका पंचायत के गांव टेलंगबे के लोग इस काम में जुटे हैं। क्षेत्र में गोभी की रोपाई शुरू हो चुकी है। जिस नाले से ग्रामीण सिंचाई के लिए पानी लाते हैं, वह नाला ग्लेशियर में दबा है। ऐसे में गांव के एकमात्र सार्वजनिक नल के पानी से बारी-बारी सब्जियों की रोपाई कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अभी उन्हें सिंचाई के लिए पानी ले जाने के लिए तीन-चार दिन और लग सकते हैं।
टेलंगबे गांव के मुकेश कुमार ने बताया कि सामुदायिक सिंचाई कूहल का मुहाना समुद्रतल से 3800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सिंचाई कूहल का मुहाना गांव से 5 किलोमीटर दूर है। वे सिंचाई के लिए लोट नाला हेड से पानी ले जाते हैं। सर्दियों में ग्लेशियर गिरने से उन्हें सिंचाई के लिए पानी ले जाने के लिए पावर चेन से ग्लेशियर काटना पड़ रहा है। संवाद