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Kullu News: सुविधाओं के अभाव में जिंदगी की जंग लड़ रहे गाड़ापारली के बाशिंदे

Sun, 01 Dec 2024 10:08 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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कुल्लू जिला के अतिदुर्गम गांव शाक्टी।-संवाद
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सरकारों ने दावे तो किए, पंचायत के गांवों को आज तक नहीं मिली सड़क और बिजली
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मरीजों को आज भी कुर्सी में डंडे बांधकर गांव से 20 किमी दूर सड़क तक लाते हैं ग्रामीण
पथरीले रास्तों से गुजरना बना मजबूरी, मीलों दूर से पीठ पर ढोकर लाना पड़ता है सामान
हरिराम चौधरी
सैंज (कुल्लू)। जिले की सैंज घाटी स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के भीतर बसे गांवों के लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव से आदिवासियों जैसा जीवन जीने पर मजबूर हैं।
सरकारें घर-द्वार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी देने का दावा तो करती है, लेकिन शाक्टी, मरौड़, मेल, मझाण और शुगाड़ गांवों की हालत सरकारी दावों को खोखला साबित करती है। बंजार विकास खंड की गाड़ापारली पंचायत के इन गांवों में अभी तक सड़क और बिजली जैसी सुविधा नहीं मिल पाई है। आए दिन इस पंचायत से मरीजों को कुर्सी में डंडे बांधकर सड़क तक लाना पड़ता है। गांव से सड़क 15 से 20 किमी दूर है। भारी बारिश हो या बर्फबारी, लोगों का पथरीले रास्तों से गुजरना मजबूरी बन गया है।
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आलम यह है कि स्वास्थ्य सुविधाओं और खाद्य सामग्री के लिए लोगों को मीलों दूर पैदल चलकर पीठ पर सामान लाना पड़ता है। विश्व धरोहर साइट ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के नियम विकास में बाधा बने हुए हैं। मरौड़ गांव तक पहुंचने के लिए लगभग नौ घंटे दुर्गम रास्तों से पैदल चलना ग्रामीणों की मजबूरी है। शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का दावा करने वाली सरकारें गांवों में बिजली की व्यवस्था नहीं कर पाई हैं। उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को 40 किमी दूर सैंज जाना पड़ता है। ग्रामीण पेयजल के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर है। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता चमन ठाकुर ने कहा कि सड़क का ऑनलाइन सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के आधार पर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन से सड़क निर्माण की अनुमति ली जाएगी।

देव नियम ही सर्वोपरि
यहां के लोगों का रहना-सहन, खान-पान और तौर-तरीके भी पारंपरिक हैं। देव आस्था में ग्रामीण परिपक्व हैं। स्थानीय देवता आदि ब्रह्मा और ध्रुव ऋषि स्थानीय बाशिंदों के लिए सर्वोपरि हैं। इन देवताओं का आदेश ही इनके लिए सब कुछ है। देवता के बनाए कानून का अनुसरण होता है। शराब इन गांवों में पूरी तरह से निषेध है। - नरोत्तम राम

नहीं है मोबाइल नेटवर्क
लोगों की एक ही इच्छा है कि इन गांवों को मूलभूत सुविधाएं दी जाएं। क्षेत्र के युवा प्रकाश ठाकुर, केहर सिंह, राकेश ठाकुर, धर्म सिंह, सोनू, कर्म चंद, सुनील और लायक राम ने बताया कि सुदूर गाड़ापारली पंचायत के शाक्टी-मरौड़ गांव के पिछड़ेपन की अजीब कहानी है। बिजली परियोजनाओं की नगरी सैंज घाटी में बसे इस गांव में सरकारी सुविधा के नाम पर मात्र एक प्राथमिक पाठशाला है। हाईटेक युग में मोबाइल नेटवर्क से गांव कोसों दूर हैं। - लिखत राम

खासा कठिन है जीवन
मरौड़ गांव की फूला देवी, डोला सिंह, राम लाल, लगन चंद, हीरादासी, तेज राम, भाग चंद, गोविंद, राम चंद, जीत राम, दुर्गी देवी और शुकरी देवी ने बताया कि गांव का जनजीवन खासा कठिन है। बिजली न होने से लकड़ी जलाकर रोशनी करनी पड़ती है। पंचायत ने बीते वर्ष गांव में सोलर लाइटें लगाकर कुछ राहत दी है, लेकिन ग्रामीण अभी भी टीवी, रेडियो और कंप्यूटर जैसे मनोरंजन के साधनों से अनजान हैं। - श्रीपत
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बनता रहा है राजनीतिक मुद्दा
वर्तमान सरकार इन गांवों के लोगों को कोरे आश्वासन देकर छल रही है। पूर्व सरकार ने बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं देने के प्रयास शुरू किए थे, लेकिन अब बंद पड़े हैं। गांवों तक सड़क और बिजली पहुंचाने के लिए समाधान तलाशा जा रहा है। नेशनल पार्क के अधिकारियों से बात चल रही है। - सुरेंद्र शौरी, विधायक, बंजार
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