घाटी के देवता मार्कंडेय ऋषि ने शनिवार को पवित्र जलाभिषेक कर शक्तियां अर्जित कीं। इस देव रिवायत के सैकड़ों कारकून, हारियान और श्रद्धालु साक्षी बने। देव परंपरा का निर्वहन ऐतिहासिक धार्मिक स्थल बला मंदिर में किया गया। पेड़चा के आराध्य देवा मार्कंडेय ऋषि के जलाभिषेक के दौरान मार्कंडेय ऋषि बला और माता बलासुंदरी भी मौजूद रहीं।
जलाभिषेक से पहले तीनों देवी-देवताओं का भव्य देव मिलन हुआ। इसके बाद मार्कंडेय ऋषि का स्थानीय लोगों ने फूलमालाओं के साथ स्वागत किया। मार्कंडेय ऋषि बला के कारदार चेतन शर्मा ने बताया कि सालों पुरानी परंपरा जलाभिषेक के निर्वहन के लिए तीनों देव रथों को बला मंदिर लाया गया।
ढोल नगाड़ों की मधुर देवधुनों के साथ देवता बला मंदिर पहुंचे। पूजा-अर्चना के बाद कन्या पूजन किया गया। इसके बाद दो घंटे तक ऐतिहासिक देव रथ के जलाभिषेक की रिवायत को निभाया गया। इस परंपरा को मार्कंडेय ऋषि बलागाड़ के कुल पुरोहित हरि शर्मा ने निभाया। जलाभिषेक के बाद मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया इस अवसर पर देवी-देवता कारदार संघ जिला कुल्लू के महासचिव टीसी महंत, कमली राम, नरू राम, टेक सिंह, बाले राम, किशोरी लाल शर्मा, हेमराज शर्मा, लोत राम, गिरधारी लाल, सुंदर सिंह, लोभू राम और मान सिंह मौजूद रहे।