बीमारियों के लक्षण दिखने पर मिलेगा प्राथमिक उपचार
सीएचओ, एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को सौंपा जिम्मा
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिले में शून्य से पांच साल तक के बच्चों की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। बच्चों को कुपोषण, निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाने के लिए उनकी अब घर पर ही स्क्रीनिंग की जा रही है।
बीमारियों के लक्षण दिखने पर उन्हें प्राथमिक उपचार भी घर पर ही दिया जाएगा। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को जिम्मा सौंपा गया है। ये सभी स्वास्थ्य कर्मी अपने संबंधित क्षेत्रों के अधीन आने वाले शून्य से पांच साल तक के बच्चों के घरों तक पहुंच बनाकर अब उनकी स्क्रीनिंग करेंगी।
गौरतलब है कि जिले के पांचों स्वास्थ्य खंडों जरी, नग्गर, बंजार, आनी और निरमंड में करीब 30,000 पांच साल तक उम्र के बच्चे हैं। इन सभी बच्चों को घर-द्वार पर प्राथमिक उपचार देने की योजना विभाग ने तैयार की है। इसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। शहरों के तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों का घर-द्वार पर उपचार मिलेगा। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ता और एएनएम बच्चों का प्राथमिक उपचार करेंगी। बच्चों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाने के लिए उन्हें विशेष नवजात शिशु रोग के एकीकृत प्रबंधन पर प्रशिक्षण भी दिया गया है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि जिला कुल्लू में नवजात शिशु रोगों की चपेट में न आएं, इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षित सभी स्वास्थ्य कर्मी बच्चों की घर-द्वार पर देखभाल करेंगी।
उन्होंने कहा क इसका फायदा यह होगा कि अब यह विशेष प्रशिक्षण पाकर स्वास्थ्य कर्मी बच्चा किस बीमारी से ग्रस्त है। इसका पता घरद्वार पर लगा पाएंगी और मौके पर ही बच्चे का प्राथमिक उपचार शुरू किया जाएगा। इससे घर से अस्पताल के बीच की दूरी तय करने से पहले ही उपचार की सुविधा मुहैया हो पाएगी।