एक ओर पुलिस कुल्लू जिले में चरस उखाड़ो अभियान के बाद दावा करती है कि चरस की खेती को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। वहीं, इसके बावजूद चरस के साथ आए दिन कई लोग पकड़े जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब चरस की खेती को नष्ट कर दिया गया है तो फिर यह चरस कहां से आ रही है? वहीं, ऐसे लोग पकड़े जा रहे हैं जिनके पास मात्र 80 ग्राम और 800 ग्राम चरस होती है।
सवाल यह भी है कि जब दर्जनों लोगों को हर साल पुलिस चरस के साथ पकड़ती है तो फिर बड़े कारोबारियों तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पा रही है? सवाल यह भी है कि कहीं बेल के खेल में यह सब पुलिस की मिलीभगत से तो नहीं हो रहा है? क्योंकि एक किलो से कम चरस के साथ पकड़े जाने पर आरोपी की जमानत आसानी से हो जाती है। उल्लेखनीय है कि जिले में पुलिस हर साल चरस उखाड़ो अभियान चला कर भांग की खेती को नष्ट करने का दावा करती है। लेकिन, इसके बावजूद हर साल दर्जनों लोगों को पुलिस चरस के साथ पकड़ रही है। इससे साफ होता है कि पुलिस का भाग उखाड़ो अभियान केवल सड़क किनारे और कागजों में ही चलता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को नशे की खेती बंद करवाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि हिमाचल में पैदा हो रहे नशे से पड़ोसी राज्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी का कहना है कि पुलिस चरस के कारोबार करने वालों पर कड़ी नजर रखे हुए है। उन्होंने साफ किया है कि चरस का काला कारोबार करने वाले किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे।