कुल्लू। जिले के दूरदराज के क्षेत्रों में भले ही सरकारें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का दावा करती हो, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर हैं। विश्व प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक गांव मलाणा में 2100 से अधिक की आबादी के लिए महज एक आशा कार्यकर्ता है। ऐसे में कैसे सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाओं का लाभ मलाणा पंचायत के आम आदमी तक पहुंच सकेगा।
मलाणा में स्वास्थ्य विभाग कोई हेल्थ सेंटर भी नहीं है। ऐसे में छोटी-मोटी बीमारी होने पर लोगों को आशा कार्यकर्ता से ही उपचार संबंधी सलाह मशविरा लेना पड़ा है। वहीं, तबीयत ज्यादा खराब हो अथवा चिकित्सक को दिखाने की आवश्यकता पड़े तो मलाणा के ग्रामीणों को सर्दी, खांसी की दवाई के लिए भी 15 किलोमीटर दूर सीएचसी जरी आना पड़ता है। सीएचसी जरी में आकर ही मलाणा के लोग अपना उपचार करवाते हैं। बताया जा रहा है कि मलाणा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक ओर आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। लेकिन किन्हीं कारणों के चलते दूसरी आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
मलाणा की भौगोलिक परिस्थितियां काफी अलग है। सर्दियों के दिनों में यहां के लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान भी जरी-मलाणा सड़क बाधित होने पर लोगों को पीठ पर सामान उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। पिछले दिनों कुल्लू में हुई जिला परिषद की बैठक में जिला परिषद सदस्य रेखा गुलेरिया ने भी इस मसले को उठाया था। उनका कहना है कि एक आशा कार्यकर्ता के कंधों पर सारा काम है, ऐसे में जल्द ही अन्य आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति होना लाजिमी है।
वर्तमान में मलाणा पंचायत में एक आशा कार्यकर्ता अपनी सेवाएं दे रही है। दूसरी की नियुक्ति की प्रक्रिया किन्हीं कारणों के चलते रुकी है।
- डॉ. नागराज पवार, सीएमओ कुल्लू