कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान निकली भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा में भाग लेते देवी-देवता और श्रद्धय
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज होते ही देवभूमि में आस्था और परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। देव महाकुंभ में भाग लेने पहुंचे सैकड़ों देवी-देवता बुधवार को अधिष्ठाता रघुनाथ के मंदिर में पहुंचे। देव शक्ति से ओतप्रोत देवरथों के रघुनाथ दरबार में पहुंचने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना रहा। वहीं, राजाओं की दादी कही जाने वाली माता हिडिंबा की मौजूदगी में अश्व और शस्त्र पूजन की रस्म निभाई गई। पूजन किया गया अश्व भगवान रघुनाथ की पारंपरिक जलेब में सबसे आगे चलता है। इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ दशहरा उत्सव की प्राचीन परंपराओं को आगे बढ़ाया।
देवता रघुनाथ के मंदिर में सदियों पुरानी देव परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया। इसके बाद सुल्तानपुर स्थित मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर स्वर लहरियों के बीच भगवान रघुनाथ को अपराह्न बाद ढालपुर स्थित रथ मैदान पहुंचाया। शोभायात्रा के निर्धारित मार्ग पर श्रद्धालुओं ने अपार श्रद्धा के साथ फूलों की वर्षा कर देवता रघुनाथ का स्वागत किया। संवाद