काउंटर पर पर्ची बनाने के लिए सुबह 9:30 बजे से ही लग रही हैं मरीजाें की कतारें
ऊझी घाटी में शुष्क ठंड ने बढ़ाया मर्ज, बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा आ रहे चपेट में
संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। पतलीकूहल सीएचसी में शुष्क ठंड की मार झेल रहे लोग सुबह से ही पर्ची काउंटर पर लाइन में खड़े नजर आए। ऊझी घाटी में सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बच्चों और बुजुर्गों की भीड़ अस्पताल में बढ़ोतरी कर रही है जिससे डाक्टरों को शाम तक मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है।
सूखे जैसे हालत के बीच पड़ रही शुष्क ठंड का सबसे अधिक असर ऊझी घाटी में पड़ रहा है। इसके प्रकोप ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ससीएचसी पतलीकूहल में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम की मार झेल रहे हैं।
पतलीकूहल अस्पताल में मरीजों की संख्या 200 के पार पहुंच गई है। सीएचसी में इलाज करने के लिए मरीज सुबह 9:30 बजे ही अस्पताल में पहुंचकर पर्ची लेने के लिए काउंटर के बाहर अपनी बारी के इंतजार के लिए लाइन लगाकर खड़े हो गए। इस दौरान जैसे ही पर्ची काउंटर खुलता है मरीजों की लाइन और भी लंबी हो जाती है। इसके बाद पर्ची लेने के बाद मरीज डाॅक्टर के पास ओपीडी में जाते हैं। खासकर सामान्य ओपीडी के बाहर सर्दी-जुकाम, वायरल, बुखार और सांस से जुड़ीं बीमारियों के मरीज आ रहे हैं। इनमें बच्चे, महिला और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। भीड़ अधिक होने से चिकित्सकों को शाम चार बजे तक मरीजों की नब्ज टटोलनी पड़ रही है। उपचार के लिए नग्गर क्षेत्र से आए बुजुर्ग मोती राम ने कहा कि वे सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। सुबह 10 बजे ही अस्पताल पहुंच गए थे लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें पर्ची बनाने से लेकर उपचार करवाने में 1:00 बज गया। पीड़ित बच्चे को लेकर आईं कटराईं क्षेत्र की हीरा देवी ने कहा कि उनके बेटा वारयल की चपेट में आ गया है। उसे डाॅक्टर को दिखाने के लिए अस्पताल आई हैं। अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से उन्हें भी दो से तीन घंटे का समय लगा है।
बुजुर्गों और बच्चों को पिलाएं गुनगुना पानी
सीएचसी पतलीकूहल के प्रभारी डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि पिछले दो हफ्तों से अस्पताल में मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि तापमान में लगातार गिरावट, हवा में नमी की कमी और धूलकणों इत्यादि वजहों से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है और तेजी से संक्रमण का शिकार बन रहे हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों में से 40 प्रतिशत मरीजों में दमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जिक, फेफड़ों का संक्रमण, खांसी, जुकाम और गले का संक्रमण है। उन्होंने सलाह दी कि बुजुर्गों और बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने के साथ गुनगुना पानी पिलाएं।