एक महीना बाद देश भर की सब्जी मंडियों में दस्तक देगा लाहौल का मटर
बागवानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद, घाटी में इस बार कम है उत्पादन
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल की भूमि में हरे मटर पर फूल खिलना शुरू हो गए हैं। लाहौल-स्पीति जिले का मटर एक महीना बाद देश भर की मंडियों में दस्तक देगा। पट्टन घाटी में मटर की फसल पर फूल खिलने से बागवानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
घाटी के हरे मटर की मांग देश भर की मंडियों में रहती है। जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह बाद मटर का तुड़ान शुरू होने की उम्मीद है। इस बार लाहौल घाटी में 954 हेक्टेयर भूमि में मटर का उत्पादन किया जा रहा है। किसानों में उम्मीद है कि इस बार कम उत्पादन से फसल के अच्छे दाम मिलेंगे।
डेढ़ दशक पहले घाटी के किसान बड़े पैमाने पर मटर और आलू की खेती करते थे। आलू उत्पादन के क्षेत्र में किसानों ने एशिया का नंबर वन लाहौल आलू उत्पादक संघ (एलपीएस) खड़ा किया था। अब मटर, आलू की पैदावार बहुत कम हो गई है। किसान अन्य सब्जियों के उत्पादन की ओर मुड़ गए हैं। मटर के फूल लगते ही व्यापारियों की नजरें भी घाटी की ओर टिक गई हैं। भले ही घाटी में अब मटर की फसल उत्पादन घट गया है, लेकिन मटर की गुणवत्ता बेहतरीन होने के चलते किसान अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। अटल टनल बनने के बाद किसानों और व्यापारियों को भी घाटी से फसल मंडियों तक लाना आसान हो गया है।
किसानों को विभाग की ओर से अनुदान पर मटर का बीज दिया जा रहा है, जिससे किसानों को काफी फायदा हो रहा है। कई किसानों ने प्राइवेट कंपनी के बीज की खरीद कर मटर की बुआई की है। इस बार जुलाई के पहले सप्ताह मटर सब्जी मंडियों में आ जाएगा। - डाॅ. मुंशी राम ठाकुर, जिला कृषि अधिकारी
खाने में स्वादिष्ट होता है मोटे छिलके का मटर
जिला कृषि अधिकारी डाॅ. मुंशी राम ठाकुर ने बताया कि लाहौल का मटर खाने में स्वादिष्ट होने के साथ वातावरण अनुकूलित होता है। इसका छिलका मोटा होने के चलते कीपिंग क्वालिटी अन्य हिस्सों से अलग है। घाटी का मौसम नगदी फसलों के लिए अनुकूल है। मटर की फसल पर अधिक रासायनिक खादों का भी प्रयोग नहीं किया जाता है। यही कारण है कि लाहौल घाटी में तैयार मटर की मांग ज्यादा रहती है।