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विकास परियोजना से कुल्लू की 46 पंचायतें शामिल

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कुल्लू। वन विभाग की एकीकृत विकास परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना है। 700 करोड़ रुपये की यह परियोजना प्रदेश के 10 जिलों की 428 ग्राम पंचायतों में कार्यान्वित की जाएगी। इसमें कुल्लू जिला की 46 पंचायतों को शामिल किया है।
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वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने परियोजना के कार्यान्वयन को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। कहा कि इसमें एक छत के नीचे अलग-अलग विभागों के अधिकारी काम करेंगे। इनमें मुख्य रूप से वन विभाग, पशु पालन, कृषि, बागवानी व जल शक्ति विभाग शामिल हैं। विश्व बैंक ने परियोजना से एक समय किनारा कर लिया था। लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से इसके लिए विशेष आग्रह किया था और आज प्रदेश को इतनी बड़ी परियोजना मिली है। परियोजना अधिकारी एचएस पाल ने कहा कि परियोजना का कार्य पूरा करने के लिए 2024-25 तक की अवधि निर्धारित की गई है। जल धारा के प्रवाह में सुधार, वाटरशेड मैनेजमेंट, कृषि भूमि के लिए पानी की उत्पादकता परियोजना के मुख्य उद्देश्य हैं। स्थायी भूमि और जल संसाधन प्रबंधन के तहत पौधरोपण, नर्सरी विकास, ट्रेंचिंग, घास का प्रबंधन, जल निकासी लाइनों का उपचार, आग से बचाव एवं जागरूकता, बसंत जल स्रोत विकास, लेंटाना घास को समाप्त करना, पारंपरिक कृषि प्रणाली विकास, जल संग्रहण एवं प्राथमिक भंडारण इत्यादि पहलुओं को परियोजना के प्रथम घटक में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार, द्वितीय घटक में जल वितरण एवं जल प्रयोग क्षमता, जलवायु आधारित कृषि का प्रदर्शन एवं प्रोत्साहन, कमजोर तथा महिला समूहों के लिए उप परियोजना निवेश, क्लस्टर स्तर पर निवेश, कृषि प्रबंधन व मंडी विकास के लिए तकनीक को विकसित करना शामिल है। परियोजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है, जो तीन माह में दो बार बैठकें करेंगी। इस मौके पर अरण्यपाल अनिल शर्मा, अरण्यपाल जीएचएनपी अजीत ठाकुर, डीएफओ सुनीता भारद्वाज, सुनीता ठाकुर, राकेश कुमार, एंजल चौहान, प्रवीण ठाकुर, मंजरी नेगी, युवराज बौद्ध तथा तरुण विमल उपस्थित रहे।
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