रात का वक्त था और पालचरा गांव में ज्यादातर लोग अपने घरों में थे। तभी अचानक पानी का तेज बहाव गांव की तरफ बढ़ने लगा। देखते ही देखते पानी के साथ मलबा भी रिहायशी इलाके तक पहुंच गया। अचानक बने इन हालात से ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई और कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों का रुख करना पड़ा।
कुल्लू के सैंज क्षेत्र की रैला पंचायत के पालचरा गांव में यह घटना पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो के एडिट-5 में पानी के रिसाव के बाद सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एडिट-5 की दबाव दीवार में रिसाव होने के बाद बड़ी मात्रा में पानी बाहर आया। पानी का बहाव अपने साथ परियोजना क्षेत्र की डंपिंग साइट पर जमा मलबा भी नीचे की ओर ले आया।
पानी और मलबा जब गांव की ओर पहुंचा तो कई घर इसकी चपेट में आ गए। ग्रामीणों के अनुसार करीब 15 परिवार प्रभावित हुए हैं। कई मकानों के आसपास मलबा जमा होने के साथ रास्तों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। कुछ दुकानों और ग्रामीणों की अन्य संपत्तियों के प्रभावित होने की बात भी सामने आई है।
रात में घर छोड़कर सुरक्षित जगह पहुंचे लोग
घटना का सबसे डरावना पहलू यह रहा कि ग्रामीणों को रात के समय अचानक घरों से बाहर निकलना पड़ा। पानी और मलबे का बहाव बढ़ता देखकर प्रभावित परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की ओर जाना ही उचित समझा।
कई लोगों ने रात रिश्तेदारों के घर बिताई। अचानक आए पानी और मलबे ने ग्रामीणों के बीच भय पैदा कर दिया है। लोगों को अब चिंता है कि यदि परियोजना क्षेत्र से दोबारा इसी तरह पानी और मलबा नीचे की ओर आया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार डंपिंग साइट पर जमा मलबा पानी के बहाव के साथ नीचे आने से नुकसान बढ़ा। इसी वजह से लोगों ने परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और प्रभावित हिस्से का तत्काल निरीक्षण करवाने की मांग उठाई है।
15 परिवारों पर टूटा मुसीबत का पहाड़
पालचरा में हुई घटना से करीब 15 परिवार प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कई घरों के आसपास मलबा जमा है। इसके अलावा रास्तों और दूसरी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों के नुकसान का मौके पर जाकर सही आकलन किया जाना चाहिए। जिन परिवारों के घर रहने लायक नहीं रह गए हैं या जिनके आसपास मलबा जमा है, उनके लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई है।
लोगों की मांग है कि राहत के साथ-साथ घटना के कारणों की भी गंभीरता से जांच हो। उनका कहना है कि केवल नुकसान की भरपाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए परियोजना क्षेत्र में पुख्ता सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।