सरकार के नए नियम से जिले के 1300 होमस्टे संचालक तल्ख
कहा - अनावश्यक रूप से जटिल बना दी पंजीकरण की प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। होमस्टे के लिए बनाए नए नियमों का विरोध शुरू हो गया है। होमस्टे संचालकों का कहना है कि सरकार ने होमस्टे की पंजीकरण प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बना दिया है।
हालांकि, सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी नहीं की है, मगर पर्यटन विभाग की ओर से नए नियम का प्रारूप तैयार करने से जिले के होमस्टे संचालकों में हड़कंप मच गया है। जिले में सबसे अधिक 1300 के करीब होमस्टे पंजीकृत हैं। नए नियम में सरकार ने पंजीकरण शुल्क 6,000 रुपये करने का निर्णय लिया है। अभी तक यह शुल्क मात्र 100 रुपये है। व्यावसायिक दरों पर बिजली-पानी के बिल लेने का भी विरोध किया है।
सोझा टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन और सराज टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन के साथ सैंज, तीर्थन, मणिकर्ण, कसोल के साथ मनाली और लाहौल में चल रहे सैकड़ों होमस्टे संचालकों ने अंदरखाते सरकार के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है।
सोझा टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रकाश ने कहा कि सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बना दिया है। पंजीकरण शुल्क बहुत अधिक कर दिया है। इससे छोटे उद्यमी प्रभावित होंगे। घरेलू उपयोग की संपत्तियों पर व्यावसायिक दरों पर बिजली-पानी के बिल लेना भी अन्यायपूर्ण है। राजेंद्र, प्रीतम शर्मा तथा संजीव कुमार ने कहा कि ग्रेडिंग सिस्टम और निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। इस कारण मनमानी कार्रवाई हो सकती है। सरकार को चाहिए कि पर्यटन विभाग की नीति पर्यटन उद्यमियों को प्रोत्साहित करने वाली होगा।
सराज टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन के महासचिव प्रकाश ठाकुर ने कहा कि नई पॉलिसी में बहुत सारे बदलाव किए गए हैं। यह हमारे पर्यटन हित में हैं। कारोबारी अपनी आपत्तियां और सुझाव 15 दिन के अंदर पर्यटन विभाग को दे सकते हैं। एसोसिएशन भी अपना पक्ष सरकार के समक्ष रखेगी। पर्यटन कारोबारी हेम राज शर्मा ने कहा कि होमस्टे पंजीकरण का शुल्क बहुत अधिक है और पानी और बिजली की बिलिंग पहले की तरह घरेलू स्तर पर होनी चाहिए।