हिमाचल में पहली अप्रैल से मैन्युअल बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। अब ट्रेजरी केवल ऑनलाइन मिलने वाली बिलों का भुगतान करेगी। ऐसे में सरकार की यह पहल जनजातीय इलाकों में विभागों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। इन इलाकों में इंटरनेट तो दूर की बात टेलीफोन सेवा कब ठप हो जाए कोई भरोसा नहीं। हालात ऐसे भी हैं कि लाहौल स्पीति में कई बार तो महीनों तक इंटरनेट सेवा ठप रहती है।
ढुलमुल इंटरनेट सेवा के बीच सरकार की यह पहल जनजातीय इलाकों में कैसे कामयाब होगा। लाहौल स्पीति प्रशासन खुद मानती है कि घाटी में इंटरनेट सेवा अन्य जिलों की तरह सुचारु नहीं है। विभागों से शिकायत मिलने के बाद लाहौल स्पीति कर्मचारी महासंघ ने इस मसले को जिला प्रशासन और विधायक के माध्यम राज्य सरकार के समक्ष उठाने का निर्णय लिया है। कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष मेघ चंद प्रभुजी ने बताया कि उदयपुर दौरे के दौरान कई विभागों ने उनसे इस तरह की शिकायत की है। ऑनलाइन बिलिंग शुरू होने से वेतन और बिलों के भुगतान में देरी होने के साथ कई विकास योजनाओं की रिपोर्ट भी समय पर भेजने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी चाहते हैं कि जब तक घाटी में इंटरनेट सेवा सुचारु नहीं हो जाती जिला में पहले की व्यवस्था को यथावत रखा जाए।
इसके लिए महासंघ विधायक रवि ठाकुर तथा उपायुक्त विवेक भाटिया के माध्यम से राज्य सरकार से इस स्तर पर रियायत देने की अपील करेेंगे। वहीं प्रदेश महासंघ के माध्यम से भी इस मुद्दे को राज्य के वित्त विभाग के समक्ष रखा जाएगा। इधर, विधायक एवं नेशनल एसटी कमीशन के उपाध्यक्ष रवि ठाकुर ने खुद माना कि लाहौल स्पीति की मौजूदा इंटरनेट सेवा इस लायक नहीं है कि सरकारी योजनाओं की रिपोर्ट ऑनलाइन तैयार किया जा सके और कर्मचारियों के वेतन और बिलों को भुगतान की प्रक्रिया को पूरी की जा सके। इस स्तर पर रियायत देने के लिए वह खुद भी मुख्यमंत्री से विशेष अपील करेंगे।