वन विभाग ने दो महीने का किराया चुकाने के लिए दिया एक सप्ताह का समय
250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से तय है किराया, रघुपुरगढ़ में चला रहे कैंपिग साइट
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। समुद्रतल से करीब 11,000 फीट ऊंचे अनछुए पर्यटन स्थल रघुपुरगढ़ में कैंपिंग साइट संचालकों को वन विभाग ने नोटिस जारी किए हैं। कैंपिंग साइट संचालकों ने दो माह से वन विभाग की ओर से तय प्रतिदिन के हिसाब से राशि जमा नहीं करवाई है।
वन विभाग ने नोटिस जारी कर एक सप्ताह में बकाया राशि जमा करने को कहा है। विभाग ने प्रति कैंपिंग का 250 रुपये रोज का किराया तय किया है।
वन विभाग से नोटिस मिलने के बाद कैंपिंग साइट संचालकों में हड़कंप मच गया है। वन विभाग का कहना कि कई कैंपिंग संचालकों ने किराया जमा नहीं किया है। बार-बार अवगत करवाने पर भी बकाया राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। ऐसे में विभाग ने नोटिस देकर एक हफ्ते में राशि जमा करने को कहा है।
गौर हो कि जिला कुल्लू के जलोड़ी दर्रा से तीन किलोमीटर दूर अनछुए पर्यटन स्थल रघुपुरगढ़ में पिछले कुछ सालों से पर्यटकों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। सरकार ने भी यहां की हसीन वादियों में आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए इको टूरिज्म के तहत कैंपिंग साइट खोलने की इजाजत दी है। तीन से चार साल से घाटी के बेरोजगार युवा मिलकर कैंपिंग साइट चल रहे हैं। इस साल गर्मियों में बड़ी संख्या में सैलानी सैर-सपाटे के लिए पहुंचे थे। जलोड़ी दर्रा से तीन किमी का ट्रैकिंग रूट घने जंगलों से गुजरता है। इससे फिर रघुपुरगढ़ पहुंचा जा सकता है। रघुपुरगढ़ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि देशभर के सैलानी यहां 12 महीने पहुंचते हैं।
रघुपुरगढ़ टूरिज्म एसोसिएशन के अध्यक्ष उगम राम ने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल वन मंडल अधिकारी से मिला था। उन्हें पूरी स्थिति से अवगत करवाया है। डीएफओ चमन राव ने कहा कि कैंपिंग साइट संचालकों को हिमाचल प्रदेश इको टूरिज्म सोसायटी की ओर से तय किया गया है। बरसात में दो माह और सर्दी में भारी बर्फबारी पड़ने पर चार माह तक कैंपिंग नहीं लगाने पर किराया वसूला जाएगा।