4.5 मेगावाट की क्षमता वाली लाहौल की थिरोट परियोजना में बिजली उत्पादन राम भरोसे है। कब लाहौल घाटी घुप अंधेरे में डूब जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता है। चार दिन से परियोजना के एक टरबाइन में खराबी आ जाने से जहां बिजली उत्पादन ठप पड़ा है। दो अन्य टरबवाइन में से एक में पानी उपलब्धता नहीं होने से एक ही टरबाइन से बिजली उत्पादन हो रहा था। लेकिन, अब इसमें भी खराबी आने से लाहौल के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बीते रविवार को टरबाइन में खराबी आने से कलपुर्जे बदलकर इसे दुरुस्त करने में जुटे हैं।
इस बीच चार दिनों से थिरोट परियोजना में बिजली उत्पादन ठप है। इससे घाटी के लोगों को कुल्लू से बिजली आपूर्ति हो रही है। वर्ष 1995 में उद्घाटन के बाद से इस परियोजना ने बिजली बोर्ड को कभी मुनाफा नहीं दिया। परियोजना के मेकेनिकल स्टाफ की जगह सिविलियन अधिकारी और कर्मचारियों से ही काम चलाया जा रहा है। इससे साफ जाहिर है कि परियोजना में कोई तकनीकी खराबी आ जाने से यहां तैनात कर्मचारी कैसे मशीनों को ऑपरेट करेंगे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पूर्व में इस परियोजना के लिए मेकेनिकल कार्यालय भी था, लेकिन गत वर्ष इसे शिफ्ट कर दिया गया है। घाटी के लोगों का कहना है कि इस परियोजना के हालात बेहद चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि बर्फबारी हो जाने के साथ कुल्लू से वैसे ही विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाएगी। थिरोट परियोजना के आवासीय अभियंता रोशनलाल ठाकुर का कहना है कि एक टरबाइन की शाफ्ट टूट गई है, जिसे अब बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि वीरवार तक खराब टरबाइन को ठीक कर विद्युत आपूर्ति पुन: सुचारु कर दी जाएगी।