जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा को जोरदार झटका लगा। बहुमत होते हुए भी भाजपा को न ही अध्यक्ष और न ही उपाध्यक्ष का पद हाथ लगा। हालत ऐसी रही कि पार्टी बहुमत होने के बाद भी चारों खानें चित हो गई। भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ी रोहिनी ने आजाद उम्मीदवार के नाम पर अध्यक्ष पद जीत लिया। उन्होंने भाजपा की सीता को एक वोट से हराया। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा के सुरेंद्र शौरी और आजाद उम्मीदवार बलजीत डोगरा को सात सात मत पड़े। बाद में पर्ची डाली गई, जिसमें बलजीत डोगरा ने बाजी मार ली।
उल्लेखनीय है कि जिला परिषद के चुनाव में 14 से 7 उम्मीदवार सीधे भाजपा के जीत कर आए थे। जबकि, सुरेंद्र शौरी भाजपा से संबंध रखते थे लेकिन टिकट न मिलने से उन्होंने बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। लेकिन, भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर न कर अपना उम्मीदवार बताया और उपाध्यक्ष पद के लिए नाम भी प्रपोज किया। लेकिन आठ सदस्य होने पर भी भाजपा को कड़ी हार का सामना करना पड़ा। वोटिंग में जहां रोहिनी को आठ वोट मिले, वहीं सीता देवी को सात वोटों के साथ ही संतोष करना पड़ा। जबकि, शौरी और डोगरा में टाई हुआ। हालांकि, भाजपा में पहले रोहिनी और सीता को ढाई-ढाई साल के लिए अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया था। लेकिन ऐन मौके पर रोहिनी अध्यक्ष पद के लिए आजाद उम्मीदवार के रूप में खड़ी हुईं और बाजी मार गईं।