वाहनों की आवाजाही के लिए रोहतांग दर्रा होकर सफर जोखिम भरा हो गया है। लिहाजा, वाहन चालकों ने अब लाहौल से कुल्लू जाने के लिए किलाड़-किश्तवाड़ वैकल्पिक मार्ग का रुख कर लिया है। हालांकि, यह मार्ग भी कम जोखिम भरा नहीं है लेकिन इस रूट पर बर्फ नहीं होने से फिलहाल जरूरतमंद लोग इसी सड़क के जरिए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ होते हुए हिमाचल में प्रवेश कर रहे हैं। सोमवार को लाहौल से करीब आधा दर्जन टैक्सियां और माल वाहक वाहन इसी रूट से कुल्लू की ओर निकले हैं। करीब तीन दिन बाद ये वाहन सुरक्षित कुल्लू पहुंच गए हैं। हालांकि, रोहतांग दर्रा होकर केलांग से मनाली की दूरी महज 121 किलोमीटर है। जबकि, वाया किश्तवाड़ यह दूरी लगभग नौ सौ किलोमीटर है। बुधवार को कुल्लू से इसी रूट से होते हुए तीन छोटे वाहन लाहौल के लिए निकले हैं। बताया जा रहा है कि शनिवार तक ये वाहन लाहौल पहुंच जाएंगे। इस रूट पर सफर करने से लोगों को अतिरिक्त किराया खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, समय की बर्बादी भी हो रही है। टैक्सी चालक सुरेश, अनिल और प्रदीप ने बताया कि रोहतांग दर्रा में बर्फ के बीच फंसने के खौफ से अब टैक्सी चालकों ने किश्तवाड़ रूट का रुख किया है। हालांकि, यह मार्ग भी बेहद जोखिम भरा होने के साथ लंबा भी है। कुल्लू से लाहौल की ओर निकले यात्री रमेश, दिनेश, अमित और सुरेंद्र ने बताया कि वह जरूरी कार्य के चलते कुल्लू गए थे। लेकिन हालिया बर्फबारी के बाद रोहतांग दर्रा होकर सफर करना संभव नहीं है, लिहाजा उन्होंने किश्तवाड़ के रास्ते घर आने का निर्णय लिया है।