सैंज घाटी की महिला कुल्लवी पट्टू दिखाते हुए।-संवाद
कुल्लू। आधुनिकता की दौड़ में भले ही जमाना बदल रहा है। नए जमाने की लड़कियां भले ही कपड़ों का चयन अपनी पसंद के अनुसार करती हैं। कुल्लू में महिलाओं की आज भी पसंद पट्टू बना हुआ है। महिलाएं पट्टू न सिर्फ शादियों में पहनती हैं बल्कि अन्य आयोजनों में महिलाएं कुल्लवी पट्टू में नजर आती हैं।
कुल्लवी पट्टू की बनावट में भी अब नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। एक फूल, दो फूल और तीन फूल वाले कुल्लवी पट्टू के डिजाइन देखने को मिल रहे हैं। हालांकि महिलाओं को यह डिजाइन खूब रास आ रहे हैं।
हालांकि पट्टू अब अधिकतर खड्डी पर ही तैयार किए जाते हैं। पर्यटकों को भी यह खूब भाते हैं। महिला सुमनलता, नेहा भारती, लवली शर्मा, रेखा ठाकुर और सीमा ने कहा कि कुल्लवी पट्टू का महिलाओं में क्रेज बढ़ा है। गांव में होने वाले मेलों में सभी महिलाएं पट्टू ही पहनती हैं। महिलाओं में नए डिजाइन के पट्टू की अधिक मांग है। उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। यह हमें संस्कृति के साथ जोड़े रखने के साथ ही हमारी पहचान भी दूसरों से अलग बनाता है।
महिला शालिनी ने कहा कि कुल्लवी पट्टू बनाने में काफी अधिक मेहनत लगती है। कुल्लवी पट्टू की खरीदारी में कोई कमी नहीं आई है। महिलाएं आज भी कुल्लवी पट्टू शौक से खरीदती हैं। भुट्टिको के अध्यक्ष एवं पूर्व बागवानी मंत्री सत्यप्रकाश ठाकुर का कहना है कि कुल्लवी पट्टू, टोपी और शॉल वर्तमान में एक अलग पहचान बना चुके हैं।