कुल्लू। रघुपुर घाटी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लगौटी में पांच महीने से डाॅक्टर का पद खाली है। स्वास्थ्य केंद्र चपरासी के सहारे चल रहा है। घाटी की चार पंचायतों के मरीजों को उपचार के लिए 30 किलोमीटर दूर आनी या फिर 100 किमी दूर जिला मुख्यालय कुल्लू जाना पड़ रहा है। आपदा से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के कारण मरीजों का अस्पतालों में पहुंचना कठिन हो गया है।
घाटी के लोग लगौटी पीएचसी में रिक्त चिकित्सक के पद को भरने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग सुध नहीं ले रहे हैं। इसे लेकर घाटी के लोगों में सरकार के प्रति भारी रोष है। बताया जा रहा है कि मरीजों को बुखार, जुकाम और खांसी सहित अन्य बीमारी की दवा के लिए 30 किलोमीटर दूर आनी अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
ग्रामीण रोहित, ध्यान कटोच, नारायण सिंह, डोला सिंह, नवल किशोर, मुकेश कुमार, दलीप कटोच और चुनी लाल ने कहा कि क्षेत्रवासियों को छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से आग्रह किया है कि क्षेत्र के ज्वलंत मुद्दे का अति शीघ्र हल किया जाए ताकि स्थानीय जनता को परेशानी न उठानी पड़े।
कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लगौटी में डॉक्टर नहीं होने से रघुपुर क्षेत्र की करशैईगाड़, फनौटी, लगौटी और टकरासी पंचायतों की करीब 5,000 आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग पांच महीने से डाॅक्टर और फार्मासिस्ट का इंतजार कर रहे हैं। अब लोग सड़क पर उतरने को विवश हो गए हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार से पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही पद भरे जाएंगे।
-डॉ. एनआर पवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
करशाला गांव निवासी टेक ठाकरे ने कहा कि उपचार को लेकर लोग खासे परेशान हैं। लोगों को बुखार और जुकाम की भी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। ऐसे में लोग उपचार के लिए जगह-जगह भटकने को मजबूर हैं। बरसात में सड़कों के बंद होने से मरीजों को दस किलोमीटर तक उठाकर ले जाना पड़ रहा है।
-टेक ठाकरे, ग्रामीण करशाला गांव
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लगौटी रघुपुर क्षेत्र की चार पंचायतों को केंद्र स्थल है। सरकार लोगों के स्वास्थ्य के प्रति कोई ध्यान नहीं दे रही है। अस्पताल मात्र चपरासी के सहारे चल रहा है। डाॅक्टर न होने से लोगों को 30 किमी दूर आनी उपचार के लिए जाना पड़ रहा है।
-राजकुमार, ग्रामीण