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Kullu News: देसी मधुमक्खी घोल रही किसानों की आजीविका में मिठास

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कुल्लू। कराड़सू में प्रदेश का पहला देसी मधुमक्खी पालन केंद्र बागवानों को मौन पालन का प्रशिक्षण दे रहा है। यहां पर अब तक सैकड़ों बागवान मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेकर अपनी आजीविका शुरू कर चुके हैं। यहां पर देसी मधुमक्खी के पालन की बागवानों को जानकारी दी जाती है। एपिस सिराना (मांहू) देसी मधुमक्खी है। वर्ष 2010 तक इसकी संख्या बेहद कम थी। 2012 में दीनदयाल ने इस दिशा में काम किया और पहला देसी मधुमक्खी पालन फार्म खोला। अब देसी मधुमक्खी को कई किसान पाल रहे हैं।
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कराड़सू में इस पहल को दीनदयाल ने अंजाम दिया है। दीनदयाल वर्तमान में मौन पालन के क्षेत्र में किसी मिसाल से कम नहीं हैं। मधुमक्खी पालन की दिशा में दीनदयाल न केवल मधुमक्खी पालन केंद्र चला रहे हैं बल्कि मधुमक्खी का ज्ञान भी दूसरों के साथ बांट रहे हैं। खास बात है कि यहां पर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी से लेकर कृषि और बागवानी विश्वविद्यालय के शोधार्थी भी व्यावहारिक ज्ञान लेने के लिए पहुंचते हैं। दीनदयाल बी फार्म के संचालक दीनदयाल ने कहा कि मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेने के लिए कुल्लू से लेकिर अन्य जिलों से भी किसान यहां पहुंच रहे हैं। अपनी सुविधा के हिसाब से किसान प्रशिक्षण ले रहे हैं। मौन पालन को किसान एक स्वरोजगार के रूप में अपनाने लगे हैं। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार ने कहा कि सरकार की ओर से मौन पालन के लिए योजनाएं भी चलाई गई हैं। युवाओं के लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है।


पहाड़ी शहद के यह हैं फायदे
पहाड़ी शहद कई प्रकार के औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें कई तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। शहद में एंटीऑक्सीडेंट का खजाना होने के साथ ही शहद हमारे इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है। खांसी और सर्दी से राहत देता है। घाव भरने और उर्जा व पाचन के लिए गुणकारी है।
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पहाड़ी शहद की कई राज्यों में मांग
देसी मधुमक्खी से निकलने वाले पहाड़ी शहद की देश के कई राज्यों में मांग अधिक है। तामिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में पहाड़ी शहद की खूब मांग है। इसके साथ ही इटली, जर्मनी और बांगलादेश के लिए देसी मधुमक्खी का शहद जा चुका है।
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