खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू में बारिश न होने के कारण खेतों से नमी सूख गई है। सूखे जैसे हालात होने की वजह से नगदी फसल मटर के उत्पादन पर असर पड़ा है। जिले में 30 फीसदी तक मटर की फसल का उत्पादन कम हुआ है। जिले का अधिकतर क्षेत्र सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो किसानों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि इन दिनों हरा मटर मंडियों में पहुंच रहा है लेकिन बारिश न होने से फसल सूखे की चपेट में आने लगी है। सिंचाई के अभाव में मटर की फलियां सूखने लगी हैं। ऐसे में घाटी के किसान नगदी फसल के प्रति काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।
जिला कुल्लू में 2,500 हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती हो रही है। घाटी के मटर उत्पादक महेश, अमित, चमन, राम चंद, मोहर सिंह आदि ने कहा कि बारिश नहीं होने से खेतों में मटर सूख रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों मटर की फसल में फूल खिले हुए हैं। बारिश नहीं होने से फसल को भारी क्षति हो रही है। शुष्क मौसम होने की वजह से उत्पादन भी घट जाएगा। वही, मंडियों में मटर के बेहतर दाम नहीं मिलने से किसानों को नुकसान हो रहा है। बारिश नहीं होने से पहले ही फसल को नुकसान पहुंचा है। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी ने कहा कि बारिश नहीं होने से नगदी फसल के सहित अन्य फसलों को भी क्षति हो रही है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान हो जाएगा। इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक सुशील शर्मा ने कहा कि सूखे की वजह से नगदी फसल को क्षति हो रही है। खेतों में नमी सूखने से उत्पादन में गिरावट की संभावना है। कुछ दिनों में बारिश न हुई तो सूखे की वजह से असिंचित क्षेत्रों में नगदी फसल मटर को नुकसान हो सकता है।