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Kullu News: कुल्लू में दूध कारोबार ने खोले तरक्की के नए द्वार

Sun, 30 Nov 2025 10:38 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कर रहीं सुदृढ़, दायरे के साथ कारोबार में भी हो रही है बढ़ोतरी
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जिले में 130.50 करोड़ का सालाना हुआ कारोबार, 246 दुग्ध उत्पादक पंजीकृत हैं समितियां
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ दुग्ध उत्पादन बन रहा है। यह पशुपालकों और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादक समितियों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
दायरा बढ़ने के साथ कारोबार में भी इजाफा हो रहा है। यह समितियां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक सहायता के साथ स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर रहीं हैं। सहकारिता विभाग के पास इस वित्तीय वर्ष में 246 दुग्ध उत्पादक पंजीकृत समितियां हैं। इन्होंने वर्ष 2025-26 में अब तक 130.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में बढ़ा कदम है।
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गौरतलब है कि जिले में हथकरघा और हस्तशिल्प समितियों के बाद दुग्ध उत्पादक समितियां ही सबसे अधिक हैं। कुल्लू के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध का कारोबार अधिक होता है। समितियों का पंजीकरण होने से दूध का कारोबार करने वाले पशुपालकों खासकर महिलाओं को आर्थिक तौर पर फायदा मिल रहा है। उन्हें कम मेहनत में मुनाफा समितियों के माध्यम से मिल रहा है। जिले में सहकारिता विभाग के पास विकास खंड नग्गर, कुल्लू, भुंतर, बंजार, आनी ओर निरमंड में पिछले ढाई साल में एक अप्रैल 2023 से अब तक (30 नवंबर 2025) तक 130 दुग्ध उत्पादक समितियों ने पंजीकरण करवाया है। यह दर्शाता है कि दुग्ध कारोबार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। इस साल वित्तीय वर्ष की बात करें तो 26 समितियां आठ माह में पंजीकृत हुई हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में करवाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमइस संबंध में सहकारिता विभाग कुल्लू की सहायक पंजीयक आशा ने कहा कि विभाग दुग्ध उत्पादक समितियों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने के लिए पहल की जा रही है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग के पास कुल 246 दुग्ध समितियां पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि इस साल समितियों ने 130.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। गत वर्ष समितियों ने 126.60 करोड़ का कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया था।
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