बता दें, महिला की माैत मामले में सोमवार को सैकड़ों लोगों ने ड़क पर उतरकर मशाल जुलूस निकाला। स्वास्थ्य विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डॉक्टर और स्टाफ को बर्खास्त करने की मांग उठाई। सराज घाटी के समाजसेवी बंटी सराजी के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। रैली के रूप में ढालपुर चौक पहुंचे। यहां पर स्वास्थ्य विभाग का पुतला फूंका। मृतक महिला के लिए न्याय की मांग की। उपायुक्त कार्यालय होते हुए क्षेत्रीय अस्पताल के गेट पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने बंद गेट को खोल कर अस्पताल परिसर में नारेबाजी की। इसके बाद रात को प्रदर्शनकारी आमरण अनशन पर बैठ गए। मंगलवार को भी हंगामा जारी रहा। अस्पताल की जांच कमेटी की रिपोर्ट से लोग संतुष्ट नहीं हुए और भड़क गए। एमएस ने अनशन पर बैठे लोगों को पढ़कर सुनाया लेकिन लोग इससे संतुष्ट नहीं हुए और फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से गठित की गई जांच कमेटी ने 47 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार की है। अनशन पर बैठे लोगों का कहना है कि इसमें ज्यादातर बिंदु डॉक्टर के पक्ष में जा रहे हैं। इसको लेकर वह संतुष्ट नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के बाद हुई महिला की मौत की घटना अत्यंत दुखद है और इस घटना से कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश सरकार को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। जयराम ने मंगलवार को क्षेत्रीय अस्पताल के बाहर अनशनकारियों से मुलाकात के बाद कहा कि प्रसव के दौरान लापरवाही और दुर्व्यवहार के कारण दम तोड़ने वाली रजनी देवी (उर्फ मंजू शर्मा) की मृत्यु का मामला खेदजनक है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने अनशनकारियों को भरोसा दिया कि वह इस विषय में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव से बात करेंगे। जयराम ठाकुर मंगलवार को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचे। उन्होंने धरने पर बैठे लोगों और पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहने का भरोसा दिलाया। इस दौरान पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, विधायक सुरेंद्र शौरी, भाजपा जिला अध्यक्ष अमित सूद, नरोत्तम ठाकुर सहित कई भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
जयराम ठाकुर ने कुल्लू अस्पताल मामले के साथ-साथ विमल नेगी मौत के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने परिजनों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह मामला जांच के अधीन है, इसलिए ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो की टिप्पणियों के आधार पर प्रदेश सरकार सीधे तौर पर कटघरे में खड़ी है। जांच में सामने आया है कि हिमाचल पुलिस के एक अधिकारी के कार्यालय में सबूत नष्ट करने के लिए योजना बनी और इसके प्रमाण तक मिले हैं। फिर भी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना सरकार जरूरी नहीं समझ रही है।