दो साल से टिन की चादरों वाली दुकानें बंद, अब देवताओं के अस्थायी शिविर में केनोपी में
दशहरा खत्म होने के बाद रेहड़ी फड़ी पर बिकेगा सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। दशहरा का स्वरूप समय के साथ बदल रहा है। केनोपी में सजा बाजार आकर्षक लग रहा है। मालरोड और प्रदर्शनी मैदान में सारी दुकानें कनोपी में हैं। दो सालों से टिन की चादरों वाली दुकानें बंद हो गई हैं। बड़े-बड़े डोम और देवी-देवताओं के टेंट भी केनोपी में दिख रहे हैं।
इस बार ट्रायल के तौर पर 25 कनोपी टेंट दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि अगले साल कुछ और देवी-देवताओं को ऐसे टेंट दिए जाएंगे। इसके साथ ही रेहड़ी फड़ी पर बिकने वाले सामान के लिए दशहरा समाप्त होने का इंतजार करना होगा। कबाड़ मार्केट दशहरा समाप्त होने के बाद ही सजेगी। ढालपुर के मेला मैदान में देवताओं के अस्थायी शिविरों के बीच काफी अधिक जगह खुली रखी गई है। ऐसे में लोगों को आवाजाही में किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है। इससे पहले दशहरा के दौरान देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों के साथ दुकानें भी लगती थीं। इससे ढालपुर के रथ मैदान की तरफ और मेला मैदान में ऐसी भीड़ होती थी कि चलना मुश्किल हो जाता था। कलाकेंद्र चौक पर हालात ऐसे होते थे कि यहां दो कदम आगे रखना भी मुश्किल होता था, लेकिन अब लोगों की आवाजाही को खुली जगह रखी गई है। लोगों को भी दशहरे की बदली हुई व्यवस्था खूब भा रही है।
देवभूमि दिव्यांग संघ नग्गर खंड के अध्यक्ष अमर चंद प्रेमी ने कहा कि पहले दशहरा के बीच दिव्यांगों को मुश्किलें आती थीं, लेकिन अब काफी खुली जगह रखी गई है, जिससे आवाजाही में आसानी हुई है। सीपीएस सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि दशहरा को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है। संवाद