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Kullu News: एप के माध्यम से पंजीकृत होंगी पांडुलिपियां

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पुरातन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए चलाया सर्वे
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों-सैंकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है। इसके माध्यम से लोगों के घरों, मंदिरों, बौद्ध मठों, संस्थाओं और संगठनों के पास मौजूद पांडुलिपियों का संरक्षण होगा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने आम लोगों से अपील की है कि जिनके पास भी पांडुलिपियां मौजूद हैं, वे इसकी जानकारी साझा करें। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने बताया कि मंत्रालय की ओर से संचालित ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के अंतर्गत पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया गया है। यह पंजीकरण ज्ञान भारत मोबाइल एप के माध्यम से या फिर ज्ञान भारतम डॉट काॅम वेबसाइट के माध्यम से पंजीकृत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार जन-सहभागिता के माध्यम से इस धरोहर को संरक्षित करने का काम कर रही है। उन्होंने आम लोगों से आग्रह किया है कि देश की अमूल्य पांडुलिपि विरासत के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के लिए शुरू किए गए इस सर्वेक्षण में बढ़-चढ़कर भाग लेकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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प्रोमिला गुलेरिया ने बताया कि सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य देशभर में उपलब्ध अप्रकाशित पांडुलिपियों का संकलन, संरक्षण एवं अभिलेखीकरण सुनिश्चित करना है। कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति की जनता से आग्रह है कि यदि किसी मंदिर, बौद्ध मठ, व्यक्ति, परिवार, संस्था, संगठन अथवा समुदाय के पास किसी भी प्रकार की पांडुलिपियां उपलब्ध हों, जो अभी तक सूचीबद्ध या पंजीकृत नहीं हुई हैं, तो वे इसकी जानकारी भाषा एवं संस्कृति विभाग के कार्यालय में उपलब्ध करवाएं।
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