रघुनाथ के मंदिर में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर्व मनाया
भगवान रघुनाथ के मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने टेका माथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। परंपरा, भक्ति और कृतज्ञता का दुर्लभ संगम बना कुल्लू का रघुनाथ मंदिर, जहां गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर भगवान रघुनाथ को नए अन्न पर विधिपूर्वक विराजमान किया गया।
सुबह से मंदिर में भक्ति का आलोक फैल गया। जैसे ही भगवान गर्भगृह से बाहर आए, श्रद्धा की लहर उमड़ पड़ी। मान्यता है कि हर वर्ष की पहली फसल का प्रथम भोग भगवान को अर्पित कर किसान अपनी आस्था और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
भगवान रघुनाथ सुल्तानपुर के मंदिर में बुधवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर्व मनाया गया। मंदिर में सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। सुबह पूजा-पाठ के बाद भगवान रघुनाथ को करीब दस बजे गर्भ गृह से बाहर लाया गया। इसके बाद मंदिर में भगवान रघुनाथ का हार-शृंगार किया गया। 12 बजकर 14 मिनट पर रघुनाथ को मंदिर से निकालकर दूसरे छोर तक लाया गया। इस बार नए उत्पन्न को पकाकर ढोर लगाकर पर्वतनुमा आकार दिया गया था। भगवान रघुनाथ को इस अनाज के पर्वत पर 12:22 मिनट पर विराजमान किया गया। यहां रघुनाथ की आरती की गई। उसके बाद 12:40 पर भगवान रघुनाथ को वापिस मंदिर ले जाया गया और 12:45 मिनट पर रघुनाथ को मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान किया गया। मंदिर परिसर में कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। उन्होंने रघुनाथ का आशीर्वाद लिया। मान्यता है कि हर साल नए अनाज के उत्पादन का पहला भोग भगवान रघुनाथ को लगाया जाता है। नए अनाज का पर्वत बनाकर रघुनाथ को उस पर बैठकर से पहले भोग लगाया जाता है।
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि इस पर्व को दो नाम से जाना जाता है। एक गोवर्धन पूजा और दूसरा अन्नकूट पर्व के रूप में। अन्नकूट पर्व के पीछे कारण है कि लोगों की साल में इन दिनों पहली फसल निकलती है जिसमें गेहूं, धान सहित अन्य परंपरागत फसलें हैं, उनका पहला भोग भगवान रघुनाथ को चढ़ाया जाता है। इस बार भी इसका निर्वहन किया गया।
इसे गोवर्धन पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। कहा जाता है कि जब धरा पर तूफान आया था तो इस दौरान भगवान ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली के सहारे उठाया था। लोगों को इसके नीचे सुरक्षित बचाया था।
भगवान रघुनाथ के वर्ष में 40 त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें अन्नकूट पर्व भी विशेष है। भगवान रघुनाथ मंदिर से निकलते हैं। दशहरा, बसंत पंचमी, जल विहार, अन्नकूट पर्व के मौके पर रघुनाथ मंदिर से बाहर निकलकर लोगों को दर्शन देते हैं।