खराहल (कुल्लू)। जिले में आजकल लिंगड़ी सब्जी आजीविका का साधन बनी हुई है। पहाड़ों से लिंगड़ी सब्जी निकालकर बाजार में बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। लिंगड़ी का आचार भी बहुत स्वादिष्ट होता है। इतना ही नहीं सब्जी मंडियों में भी भारी मात्रा में लिंगड़ी पहुंच रही है।
प्रदेश के कई जिलों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली सब्जी लिंगड़ी बाजारों में इन दिनों देखने को मिल रही है। यह प्राकृतिक सब्जी नदियों, नालों और ऊंचाई वाले इलाकों में उगती है। इस सब्जी को स्थानीय लोग और पर्यटक खूब पसंद करते हैं। जिले के अलावा मंडी, कांगड़ा और शिमला में भी यह प्राकृतिक रूप से उगती है। सब्जी मंडियों में लिंगड़ी के बेहतर दाम मिल रहे हैं। इन दिनों इस सब्जी का सीजन जारी है। शुरुआती दौर में 70 से 80 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिक रही है। सीजन के दौरान 40 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक दाम मिलते हैं।
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नदी-नालों के आसपास और जंगलों में पाई जाने वाली जैविक पौध लिंगड़ी न केवल पौष्टिक सब्जी है, बल्कि इसमें कई किस्म की विटामिन पाई जाती हैं। विटामिन-ए, विटामिन-बी, पोटाशियम, काॅपर आयरन, फैटी एसिड, सोडियम फास्फोरस, मैग्नीशियम और फाइबर इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
-ऋतु गुप्ता, उपनिदेशक कृषि विभाग कुल्लू