ननद और बेटे के साथ घर से निकलते समय पड़ोस में रहने वाली महिला को भी निकाला
महिलाएं बोलीं- आशियाने तबाह हो गए, तन में पहने कपड़ों के सिवाया कुछ भी नहीं बचा
गौरीशंकर
कुल्लू। इनर अखाड़ा बाजार में आधी रात आई तबाही ने कई जिंदगियां उजाड़ दीं लेकिन उसी अंधेरे में मंजू सूद की जागरूकता एक औरत की जान बचा गई।
तेज बारिश और भूस्खलन के बीच मंजू ने न सिर्फ अपने परिवार को बाहर निकाला, बल्कि पड़ोस में अकेली रह रहीं सीता को भी आवाज देकर बाहर खींच लाईं। जैसे ही सब बाहर निकले, उनका घर मलबे में तब्दील हो गया। जो तन पर था, वही बचा, बाकी सब जीवन भर की कमाई के साथ मिट्टी में मिल गया।
मूसलाधार बारिश और आधी रात के समय घर में अचानक कंपन सी हुई। मंजू सूद ने ननद और बेटे के साथ घर से निकलने का प्रयास किया। इस दौरान ख्याल आया कि पड़ोस में एक महिला अकेली रहती है। उन्होंने महिला सीता को आवाज लगाई और बाहर निकलने के लिए कहा। घर से निकले ही थे कि पहाड़ी से हुए भूस्खलन में घर पूरी तरह दब गए। मंजू सूद ने बताया कि वे अपने घर से कुछ नहीं निकाल पाए। तन पर पहने कपड़े ही बचे हैं। घर पूरी तरह तबाह हो चुका है। सीता देवी के अनुसार उनका मकान भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। वह मकान में अकेले रहती थीं। अब रहने को ठिकाना नहीं बचा है। बेटी के घर में शरण ली है।
मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटीं रेस्क्यू टीमें
इनर अखाड़ा बाजार में यह हादसा हुआ। बीती मंगलवार मध्य रात्रि को हुई घटना में कुछ लोगों ने घरों से निकलकर जान बचाई तो एनडीआरएफ का एक जवान और एक कश्मीरी मजदूर दब गए हैं। इनकी तलाश के लिए बुधवार को दिनभर सर्च अभियान चला लेकिन वीरवार सुबह के समय इससे करीब 60-67 मीटर दूर फिर से भूस्खलन हो गया। इसकी चपेट में दस और लोग आ गए थे। इनमें वीरवार को ही तीन लोगों को घायलावस्था में निकाला गया था। इनका उपचार चल रहा है। एक की मौत हो गई है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। शुक्रवार को मलबे में दबे आठ लोगों में से एक महिला सहित तीन लोगों के शव बरामद हुए हैं। रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ, होमगार्ड, अग्निशमन व पुलिस के जवान डटे हुए हैं। अभी पांच लोगों की तलाश जारी है।