केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। जहां पहले दिसंबर और जनवरी में भारी बर्फबारी होती थी, वहीं अब अप्रैल में रिहायशी इलाकों में बर्फबारी हो रही है। विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु चक्र का असर मान रहे हैं।
बुधवार को अटल टनल रोहतांग सहित लाहौल के कई रिहायशी क्षेत्रों में अप्रैल में दूसरी बार बर्फबारी दर्ज की गई। कुल्लू में मंगलवार रात से लगातार बारिश का दौर जारी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। स्थानीय बुजुर्ग किसान सोनम दवा और छेरिंग का कहना है कि दशकों पहले दिसंबर और जनवरी में भारी बर्फबारी होती थी, जो हिमनदों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती थी। पिछले कुछ वर्षों में मौसम चक्र पूरी तरह बदल गया है। इस बार जनवरी में बारिश दर्ज की गई, जबकि अप्रैल में बर्फबारी हो रही है।
मौसम में इस बदलाव का असर हिमनदों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सर्दियों में कम बर्फबारी के कारण सैकड़ों साल पुराने ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, वहीं असामान्य मौसम के चलते कई बड़े हिमनदों के टूटने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. चौधरी राम ने बताया कि इस बदलाव का सीधा असर खेती पर भी पड़ रहा है। अप्रैल में हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण घाटी में बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अटल टनल रोहतांग बनने के बाद क्षेत्र के मौसम में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पर्यावरण, जल संसाधनों और कृषि पर इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।