उच्च गुणवत्ता वाला बीज पहुंचा, 100 से 120 रुपये प्रतिकिलो है लहसुन के बीज का दाम
सर्टिफाइड बीज 150 रुपये किलो, हिमाचल में लहसुन उत्पादन में दूसरे नंबर पर है कुल्लू
जिले में 1600 से अधिक हेक्टेयर में होती है पैदावार, लहसुन की खेती से जुड़े हैं सैकड़ों किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। लहसुन की खुशबू एक बार फिर कुल्लू की वादियों में फैलने वाली है। कश्मीर से पहुंचा उच्च गुणवत्ता वाला बीज अब किसानों के खेतों में नई उम्मीदें बोने जा रहा है।
रबी सीजन की दस्तक के साथ ही किसान लहसुन की बिजाई की तैयारी में जुट गए हैं। करीब 1600 हेक्टेयर भूमि पर होने वाली लहसुन की पैदावार से कुल्लू जिला हिमाचल में सिरमौर के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां उगने वाला लहसुन दक्षिण भारत तक अपनी खास पहचान बना चुका है। कश्मीरी लहसुन का बीज 100 से 120 रुपये प्रतिकिलो है। सर्टिफाइड बीज 150 रुपये प्रतिकिलो तक है। जिले के किसान सैकड़ों लहसुन की खेती से जुड़े हैं। आनी, बंजार, कुल्लू और मनाली में किसान लहसुन की खेती कर रहे हैं। किसानों का लगातार नगदी फसल लहसुन के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है। रबी सीजन में निचले क्षेत्रों में किसान लहसुन बिजाई करते हैं।
वर्ष 2024 में कुल्लू में 33500 मीट्रिक टन लहसुन की पैदावार हुई थी। वर्ष 2025 में भी अच्छी पैदावार हुई है। बरसात निपटने के बाद अब किसान लहसुन की बिजाई करेंगे। उच्च क्वालिटी वाले बीज के लिए किसान विक्रेताओं से संपर्क साध रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग किसानों को लहसुन का बीज उपलब्ध करवाएगा। पार्थ गारलिक सीड कंपनी अखाड़ा बाजार के संचालक प्रसून शर्मा ने कहा कि लहसुन का बीज किसानों को पिछले साल के मुकाबले सस्ता मिल रहा है। सर्टिफाइड बीज 150 रुपये, जबकि कश्मीरी लहसुन का बीज 100 से 120 रुपये प्रतिकिलो तक है। किसान बीज के लिए संपर्क कर रहे हैं।
कुल्लू के लहसुन की दक्षिण भारत में है काफी मांग
कुल्लू में तैयार होने वाली लहसुन की दक्षिण भारत में काफी मांग रहती है। लहसुन जब निकलता है तो दक्षिण भारत से व्यापारी कुल्लू जिले का रुख करते हैं। कुल्लू में किसानों और मंडियों से लहसुन खरीदते हैं। किसानों को मांग अच्छी होने से बेहतर दाम भी मिलते हैं।