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Kullu-Manali Disaster: कुल्लू-मनाली में तीन साल में दो बड़ी आपदाएं... नहीं लिया सबक, हाईवे समेत खतरे में गांव

Wed, 17 Jun 2026 10:44 AM IST
Ankesh Dogra संजय भारद्वाज, मनाली।

सार

कुल्लू-मनाली क्षेत्र में 2023 और 2025 की विनाशकारी आपदाओं के बावजूद स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। ब्यास नदी के कटाव से प्रभावित हाईवे और कई गांव आज भी खतरे की जद में हैं। 400 करोड़ रुपये की प्रस्तावित सुरक्षा परियोजना नौ महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाई है, जिससे मानसून से पहले स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। पढ़ें पूरी खबर...
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कुल्लू-मनाली में तीन साल में दो बड़ी आपदाएं। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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कुल्लू-मनाली में 2023 और 2025 में आई दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं ने विकास कार्यों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी थी। सोलंग घाटी से लेकर कुल्लू तक ब्यास नदी के उफान और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। सार्वजनिक और निजी संपत्ति नष्ट हो गई। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए। 

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विडंबना यह है कि दो बड़ी आपदाओं के बाद भी क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपायों को लेकर अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। कई संवेदनशील स्थानों पर आज भी न तो मजबूत सुरक्षा दीवारें बनी हैं और न ही राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित करने के लिए व्यापक कार्य किए गए। ब्यास के किनारे स्थित सोलंग, पलचान, नेहरूकुंड, मनाली, बाहंग, पतलीकूहल, रायसन और कुल्लू के कई हिस्से आज भी खतरे की जद में हैं। आपदा के दौरान नदी ने कई स्थानों पर तटों को काट दिया था। मनाली से कुल्लू तक लगभग 12 जगह कई मीटर हाईवे ब्यास में समा गया। यह अभी भी अस्थायी तौर पर ही चल रहा है। 

कई होटल, दुकानें, घर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी नदी के कटाव और बाढ़ की चपेट में आए। उस समय प्रशासनिक स्तर पर भी योजनाएं तैयार करने की बात कही गई थी। आपदा को लंबा समय बीत जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा। 

सबसे बड़ी चिंता राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर है। आपदा के बाद स्थायी समाधान के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर होने की बात कही गई थी, लेकिन नौ महीने बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। इस परियोजना के तहत ब्यास नदी के किनारे तट संरक्षण, सुरक्षा दीवारों का निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित करने के लिए विभिन्न स्थायी उपाय किए जाने थे। एनएचएआई के परियोजना अधिकारी वरुण चारी ने कहा कि एनएच का स्थायी हल जल्द होगा। इसके लिए टेंडर हो गए हैं। जल्द कार्य शुरू किया जाएगा।

भूस्खलन के कारण खतरे में सोलंग गांव
सोलंग गांव के नीचे भूस्खलन से गांव खतरे की जद में है। बाहंग में भी ब्यास का रुख रिहायशी इलाकों की तरफ है। बाढ़ आई तो बाहंग में भारी तबाही होगी। सोलंग गांव में भी सुरक्षा की दृष्टि से कोई कार्य नहीं किए गए। जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता दीक्षांत शर्मा ने कहा कि बाहंग और सोलंग में सुरक्षा दीवार के लिए लगभग दो करोड़ का प्रस्ताव बनकर मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है।
 
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लोग बोले, प्रशासन की तैयारी नहीं दिखाई देती
सोलंग के निवासी विशाल ने बताया कि बरसात का मौसम एक बार फिर नजदीक आ गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की तैयारी दिखाई नहीं दे रही। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार निर्माण की घोषणा हुई थी। ऐसा नहीं हुआ।

बाहंग के विनोद कुमार ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए तो मानसून में गांवों को फिर से खतरे का सामना करना पड़ सकता है। केवल घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य होना जरूरी है।
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