रोहतांग (लाहौल-स्पीति)। कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण न होने जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की ग्राम पंचायत कोकसर को प्रदूषण बोर्ड ने एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। एनजीटी के ध्यान में मामले आने के बाद यह कार्रवाई हुई है। एनजीटी ने पिछले महीने कोकसर पंचायत में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण न होने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी फटकार लगाई थी।
वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निष्पादन न करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से यह कार्रवाई अमल में लाई गई है। पंचायत की ओर से वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कचरे को डंप करने के लिए जो प्रबंध किए गए हैं, वे भी नाकाफी हैं। एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से की गई कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है।
गौर रहे कि जनजातीय जिला लाहौल के तहत आने वाले कोकसर क्षेत्र में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों की अधिक संख्या के चलते यहां पर कचरा भी स्थानीय पंचायतों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। इससे पहले लाहौल का कचरा भी मनाली के रांगड़ी स्थित कूड़ा संयंत्र में आता था। मगर जब से लाहौल का कचरा मनाली के रांगड़ी संयंत्र में जाना बंद हो गया है, कचरे का निष्पादन चुनौती बन गया है।
एनजीटी के अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने कहा कि लाहौल की कोकसर पंचायत द्वारा कूड़े-कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण न करने एनजीटी सख्त हुआ है। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई करने के निर्देश जारी हुए थे। इसी के आधार पर अब कोकसर पंचायत पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।