पतलीकूहल (कुल्लू)। कटराईं में शुक्रवार को जलवायु परिवर्तन के दौरान सेब की फसल को बचाने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।यह कार्यशाला गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के हिमाचल क्षेत्रीय केंद्र ने आयोजित की। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और उच्च पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए संस्थान एक ऐसी प्रणाली तैयार कर रहा है, जो उप-मौसमी से लेकर मौसमी पूर्वानुमान और स्थान-विशिष्ट जोखिम मानचित्र का उपयोग करेगी।
आईआईटी मुंबई के डॉ. रविचंद्रन और डॉ. अक्षय निकुंभ ने हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ और चरम मौसम की घटनाओं के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उद्यान विभाग की विषयवस्तु विशेषज्ञ डॉ. बिंदु शर्मा ने बागवानी विभाग की ओर से मौसम की निगरानी के लिए की जा रही पहलों की जानकारी दी।
कुल्लू फलोत्पादक मंडल के महासचिव रिमन सिंह ठाकुर ने कुल्लू घाटी में सेब उत्पादन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज हैदराबाद के डॉ. बिभु पी नायक ने सर्वेक्षण प्रश्नावली पर चर्चा की। एनआईटी हमीरपुर के डॉ. विजय शंकर डोगरा ने कहा कि यह कार्यशाला सेब बागवानी को भविष्य की जलवायु चुनौतियों के प्रति लचीला बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। संवाद