किसान बोले- ओलों की मार से फट गईं फलियां, बाहर आ गया मटर का दाना
इस बार अच्छी थी फसल, मटर से सेब को हुए नुकसान की भरपाई की थी उम्मीद
मांग ... ओलावृटि से नुकसान का आकलन कर प्रभावितों को मुआवजा दे सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। आसमान से बरसे ओलों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। करीब 20 मिनट तक लगातार हुई ओलावृष्टि से मटर की 50 फीसदी तबाह हो गई है। इससे किसानों को लाखों रुपये की चपत लगी है।
ओलों से भारी तबाही से प्रभावित हुए जिले के किसानों ने सरकार से मुआवजा देने की मांग की है।
बीती वीरवार शाम को मौसम ने एकाएक करवट बदली। जिले के बाह्य सराज की रघुपुर घाटी के साथ गड़सा, सैंज, मणिकर्ण और बंजार घाटी में जमकर ओले बरसे। लगभग 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि से बाह्य सराज की रघुपुर घाटी में खेतों में तैयार मटर की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। क्षेत्र के 500 किसानों को बड़ा झटका लगा है। ओले की मार से मटर की फलियां फट गईं और दाना बाहर आ गया। किसानों का दावा है कि ओलावृष्टि से लगभग 50 प्रतिशत फसल खराब हो गई है।
किसान केसर सिंह, खेम राज, पदम सिंह, राजू, सोहन लाल, धर्म सिंह, सुंदर सिंह और किशोरी लाल ने कहा कि यह साल किसानों-बागवानों के लिए ठीक नहीं है। पहले आपदा से सेब को भारी नुकसान हुआ। आधा से भी कम कीमत पर सेब बिका। किसानों को मटर की फसल से बागवानी को हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद थी लेकिन ओलावृष्टि ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस बार पांच से 10 फीसदी ज्यादा मटर की बिजाई की गई है। मंडियों में भी 150 रुपये से अधिक प्रति किलो मटर बिक रहा है। खेतों में फसल तैयार है। कुछ किसानों ने तुड़ान भी शुरू कर दिया है। रघुपुर घाटी की बनाला, जुहड़, फनौटी, निचली फनौटी, दपांदा, करशााला, रोहाचला, बालू, लोट, घुहाटन, कांडीबाग, छलाच, शुश, करशाालाबाग, खनेर, लुहाल, खनाग, कोठी और मुहान पंचायतों के कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई है। उन्होंने सरकार से नुकसान का आकलन का प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की है।
इस बार करीब दो से तीन लाख रुपये का मटर होना था। फसल भी अच्छी थी लेकिन ओलावृष्टि ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ओलों की मार से मटर की फलियां फट गई हैं। लगभग 50 फीसदी फसल को का नुकसान हुआ है। - केसर सिंह ठाकुर, जुहड़
लगभग 20 मिनट तक ओलावृष्टि होती रही। किसानों के खेतों में मटर की फसल तैयार हो गई है। सरकार को नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देना चाहिए। इस साल मौसम की मार से किसानों-बागावानों को भारी नुकसान हुआ है। -खेम राम ठाकुर, फनौटी