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Kullu News: टांकरी लिपि का संरक्षण करेगा हिम संस्कृति शोध संस्थान

Sat, 11 Oct 2025 10:08 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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कुल्लू के लोरन सड़क पर पार्क की गई वाहन।-संवाद
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उत्तर भारत में 11 शताब्दी से आजादी तक होता रहा टांकरी का प्रयोग
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18 वर्ष से प्रदेश से प्राप्त पांडुलिपियों पर शोध कर रहे डाॅ. यज्ञ दत्त शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। 11वीं शताब्दी से लेकर देश की आजादी तक उत्तर भारत में पांडुलिपियों का सबसे अधिक इस्तेमाल होता था। अब हिम संस्कृति शोध संस्थान देहुरी टांकरी लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आया है।
लोगों और युवाओं को टांकरी लिपि का ज्ञान दिया जाएगा जिससे पांडुलिपियों में लिखे गए पुराने रहस्यों के बारे में जाना जा सके।
आजादी के बाद करीब सात दशकों तक टांकरी लिपि की अनदेखी हुई। अब इसके संरक्षण के लिए केंद्रीय सांस्कृतिक विश्वविद्यालय वेदव्यास परिसर, बलाहर कांगड़ा में सहायक आचार्य डॉ. यज्ञ दत्त शर्मा आगे आए हैं।
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उन्होंने टांकरी और शारदा लिपि का सामान्य अध्ययन घर पर ही किया। उन्होंने कहा कि 11 शताब्दी से आजादी तक टांकरी लिपि हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तराखंड एवं पंजाब में प्रचलित आधिकारिक लिपि के रूप में प्रयोग में लाई जाती रही है। अब यह लिपि एवं इसमें निहित ज्ञान विज्ञान पोथियां नष्ट हो रही हैं।
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डॉ यज्ञदत्त शर्मा 18 वर्ष से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त पांडुलिपियों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने इसकी पूर्ण वर्णमाला, बाराखडी, संयुक्ताक्षर प्राप्त कर जन-जन को सिखाने का संकल्प लिया है। टांकरी का फोंट भी तैयार किया है। अभी तक सैकड़ों लोगों को टांकरी लिपि का ज्ञान दे चुके हैं। टांकरी लिपि को घर-घर पहुंचाने के लिए हिम संस्कृति शोध संस्थान का गठन किया है। इसका गठन पहाड़ी भाषाओं का संरक्षण, पहाड़ी लिपियों का संरक्षण, पहाड़ी संस्कृति के सरंक्षण के लिए किया है। संस्थान टांकरी लिपि का यूनिकोड बनाने का प्रयास कर रहा है। संस्थान किन्नौर और कांगड़ा जिले में टांकरी लिपि सिखाने के लिए कार्यशालाएं करवा रहा है।
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