स्टॉल पर परंपरागत व्यंजन परोस कर आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रहीं महिलाएं
सैकड़ों महिलाओं ने बनाया रोजगार का जरिया, लोगों को भा रहा कोदरे का सिड्डू
गौरीशंकर
कुल्लू। कुल्लू की रसोई से उठने वाली सोंधी खुशबू अब बाजार में रोजगार का जरिया बन गई है।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार सिर्फ संस्कृति ही नहीं, सिड्डू, कचौरी और कोदरे के स्वाद के साथ महिलाओं का संघर्ष और सफलता भी परोसी जा रही है। दशकों से घरों तक सिमटी ये परंपरागत थाली, अब महिलाओं की कमाई और आत्मनिर्भरता की थाली बन चुकी है।
कुल्लू की शीला नेगी और रजनी ठाकुर ऐसे नाम हैं जिन्होंने सिड्डू को बाजार में उतारा है। आज यह परंपरागत व्यंजन सैकड़ों महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बन गया है। दशहरा उत्सव में महिलाओं ने सिड्डू, कचौरी जैसे परंपरागत व्यंजन परोसने के लिए स्टाॅल खरीदे हैं। अच्छी-खासी कमाई भी कर रही हैं। पहले आटा के सिड्डू ही बेचे जा रहे थे लेकिन अब कोदरा के सिड्डू भी बेचने शुरू किए हैं। ये लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं।
60 में आटा और 80 में कोदरे का सिड्डू
दशहरा उत्सव में महिला मंडल, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाएं परंपरागत व्यंजन परोस रही हैं। प्रदर्शनी मैदान में सजी स्थानीय व्यंजनों की मार्केट में लोगों की अच्छी-खासी भीड़ जुट रही है। लोगों को सिड्डू, कचौरी खूब भा रहे हैं। हालांकि मोमो, चाऊमीन भी उपलब्ध हैं लेकिन लोगों का ध्यान परंपरागत व्यंजनों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहा है।
25 साल से सिड्डू बेच रही हैं। कुल्लू दशहरा में हर साल स्टाॅल लगाती हैं। हर बार अच्छा कारोबार रहता है। इस बार आपदा के चलते कम कारोबार होने की उम्मीद थी लेकिन अच्छा काम चला है। काफी संख्या में लोग सिड्डू और अन्य परंपरागत व्यंजन को पसंद कर रहे हैं।
- शीला नेगी, सिड्डू कारोबारी
वर्ष 1999 में पहली बार सिड्डू का स्टाॅल लगाया था। इसे खूब सराहा गया था। इसके बाद इसे व्यवसाय के तौर पर अपनाया। इसमें परिवार ने भी मदद की। सास सिड्डू बनाती हैं और मैं बेचती हूं। मेले में तो स्टाॅल लगता है, बबेली राफ्टिंग पॉइंट में भी स्टाॅल लगाया है। -रजनी ठाकुर, कुल्लू
उत्सव में कचौरी का स्वाद चखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। इस क्षेत्र में 20 सालों से काम कर रही हूं। ऐसा दशहरा कोई नहीं रहा जब यहां स्टॉल नहीं लगाया। परंपरागत व्यंजन को हर साल लोग पसंद कर रहे हैं। इस बार भी लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
- सोनिया शर्मा, मंडी
दशहरा उत्सव के लिए लगे बाजार में कोदरे के सिड्डू लेकर आए हैं। लोगों को यह खूब पसंद आ रहा है। यहां आटा का सिड्डू हालांकि 60 रुपये में बिक रहा है लेकिन कोदरा का सिड्डू 80 रुपये में दिया जा रहा है। उत्सव में लोग भी इसे हाथोंहाथ खरीद रहे हैं। - पूजा ठाकुर, बजौरा