कुल्लू जिला के सैंज घाटी के देहुरीधरार पंचायत के तुंग गांव में थान देवता मंदिर को भूस्खलन से खतरा पैदा हो गया है। भूस्खलन से करीब 60 सेब के पेड़े भी ढह गए हैं।
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जिला कुल्लू में सोमवार रात्रि को हुई मूसलाधार बारिश से पांच पुल और दो पुलिया बह गईं। कुल्लू के मनाली, लगवैली व सैंज घाटी में सोमवार रात्रि को हुई मूसलाधार बारिश से अति दुर्गम पंचायत शैंशर में चार पुल बह गए। मनाली के सोलंग गांव को व्यास नदी पर बना अस्थायी पुल भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया। वहीं सैंज की शांघड में दो पुलिया नाले में आई बाढ़ से बह गईं हैं। बाढ़ आने से घाटी के नदी-नालों का जलस्तर उफान पर हैं। सोमवार रात को घाटी में हुई भरी बरसात से सोंलग गांव, लगघाटी, शैंशर, देहुरीदार, गाड़ापारली और शांघड़ पंचायत में लोगों में अफरा-तफरा मच गई। कई गांव के घरों में बरसात का पानी भी घुस आया। वहीं जिला मुख्यालय से बहने वाली व्यास नदी व सरवरी नाले का जलस्तर उफान पर है। जिला में जगह-जगह हुए इस नुकसान की सूचना स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन को दे दी है। शैंशर पंचायत के प्रधान नरेश कुमार ने बताया कि सोमवार रात को हुई मूसलाधार बारिश से उनकी पंचायत के कटोल नाला में आई बाढ़ से बटोल, गजदारू, जंगलनाला तथा झानाला नामक पुल धराशाई हो गए।
कई जगहों पर भारी भूस्खलन होने से लोगों के खेत खलियान बह गए हैं और डोला राम के घर बरसात का पानी आ घुस गया। देहुरीधार पंचायत की प्रधान निर्मला देवी ने कहा कि मूसलाधार बरसात से उनकी पंचायत के तुंग गांव स्थित देवता थान के मंदिर परिसर के ढहने से मंदिर को खतरा हो गया है। वहीं इसकी चपेट में हीरा लाल व मोती राम के 60 सेब के पौधे क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं, न्यूली व दारठा को जोड़ने वाली दो पानी की स्कीमें भी टूट गई हैं। रुआड गांव में नाले का पानी खेतों में आने से टमाटर, मक्की व गोभी की फसल तबाह हो गई है। शांघड पंचायत में भी दो पुलिया बहने से घाटी का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। वहीं गाडापारली पंचायत में बरसात से भारी नुकसान के साथ तीन भेड़ों, एक बैल व एक गाय के बह जाने की भी सूचना मिली है। बारिश से जगह-जगह हुए भारी भूस्खलन से जिला में आधा दर्जकर के करीब मार्ग पर बसों की आवाजाही बंद हो गई है। रैला के पास निगम की एक बस भी भूस्खलन से फंस गई है। इसके अतिरिक्त लगवैली के समाणा गांव के पास बनी झील से गांव को भूस्खलन का खतरा बना है।
उधर, ऊझी घाटी के सोलंग गांव के लिए ब्यास नदी में बनाया गया अस्थायी पुल बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। पुल के पानी में बह जाने से सोलंग के ग्रामीणों का संपर्क मनाली से कट गया है। स्थानीय निवासी टिकम राम और रूप चंद ने बताया कि ब्यास में बाढ़ आने से ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थायी पुल बह गया है। नाग मंदिर के पास भी लोहे का अस्थायी पुल बना हुआ है लेकिन पानी अधिक आने की सूरत में वह भी सुरक्षित नहीं है। पुल तक जाने का रास्ता भी जोखिम भरा है। इस कारण ग्रामीणों को पलचान से खड़ी चढ़ाई चढ़कर कठिन रास्ते से घर पहुंचना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत प्रधान सुंदर ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार की अनदेखी सोलंगवासियों पर भारी पड़ गई है। मुख्यमंत्री ने पिछले साल सोलंग पुल का शिलान्यास किया था जिसका एक साल बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। वहीं, एसडीएम मनाली ज्योति राणा ने बताया कि सोलंग गांव के लिए झूला पुल बनाना प्रस्तावित है। पीडब्ल्यूडी विभाग के मैकेनिक विंग को झूला पूल शीघ्र बनाने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की हर संभव मदद की जाएगी।