स्वास्थ्य खंड जरी के दलाशणी गांव के लोग डायरिया की चपेट में आए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दलाशणी गांव जाकर रोग पर काबू पाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है लेकिन अभी तक आईपीएच विभाग की सप्लाई से लोगों को मटमैला पानी मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए कंडाघाट लैब के लिए भेज दिया है।
गौरतलब है कि फरवरी माह शुरू होते ही दलाशणी गांव में डायरिया बीमारी फैल गई है। जानकारी के अनुसार मटमैला पानी पीने से लोगों में यह बीमारी फैल गई है। बारी-बारी से परिवार के सदस्य बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को गांव का दौरा किया। इस दौरान 16 लोग डायरिया की चपेट में पाए गए। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को दवाइयां बांटी।
वहीं, इससे पहले भी 16 फरवरी को 49 के करीब लोग बीमारी की चपेट में आए थे। जिनका अभी उपचार चल रहा है। बीएमओ जरी डॉ. नीना लाल ने बताया कि गंदा पानी पीने से लोग डायरिया की चपेट में आए गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं टीम लेकर गांव का दौरा किया और मौके पर जाकर लोगों को चैकअप कर दवाइयां बांटी गई। बीएमओ ने जनता
से पानी को उबालकर पीने और वार्ड पंचों को पानी में व्लीचिंग पॉडर डालने की अपील की है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वाईडी शर्मा ने कहा कि बीएमओ जरी डॉ. नीना लाल ने गांव का दौरा कर लोगों के स्वास्थ्य जांचा है। उन्होंने बताया कि बीमार लोगों की हालत ठीक है। उन्हें दवाइयां दी गई है। टीम ने पानी के सैंपल भी भरे हैं और निरीक्षण के लिए कंडाघाट भेज दिए गए हैं।