बंजार के चैहणी में फागली उत्सव के दौरान मुखौटा पहनकर नृत्य करते देवलू।-ग्रामीण
आस्था... बंजार और सराज घाटी में सैकड़ों लोग बने दैवीय चमत्कार के साक्षी
फागली उत्सव की रही धूम, मस्तराम और यज्ञचंद ने पकड़ा फूलों का गुच्छा
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। बंजार समेत सराज घाटी में फागली उत्सव में अनोखी दैवीय चमत्कार के सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने हैं। देवताओं और दैत्यों के युद्ध में बेशक देवताओं की जीत हुई है, लेकिन गत वीरवार की पूरी रात घाटी के लोग राख फेंककर बुरी शक्तियों को भगाते रहे। घाटी के विभिन्न स्थानों पर मनाए गए फागली उत्सव में लोग कांटेदार झाड़ियों पर इस कद्र कूदे कि मानों मखमली चादर बिछ गई हो।
घाटी के विभिन्न गांवों में परंपरा के अनुसार कांटेदार झाड़ियों के ढेर लगाए, जिन पर देवता के गूर और मुखौटे धारियों ने नंगे पांव कंटीली झाड़ियों पर नृत्य किया। हालांकि, इस देव परंपरा के निर्वहन के समय किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई। इस दैवीय चमत्कार के श्रद्धालु साक्षी बने हैं। घाटी के गांव रोपा, तांदी, सजवाड,बेहलों, चैहनी, वीणी, कलवारी में फागली उत्सव की धूम रही। शुक्रवार को चैहनी कोठी में फागली उत्सव के दौरान भगवान विष्णु के सम्मान में चैहनी बीठ पर्व का आयोजन किया गया। बीठ पर्व के दौरान एक टोकरी में रखे नर्गिसी फूलों के गुच्छे को देव आदेश के पश्चात एकत्रित भीड़ के ऊपर फेंका गया। चैहनी गांव के मस्तराम व मियागी गांव के यज्ञचंद ने नर्गिसी फूलों के गुच्छे को पकड़ा। मान्यता है कि जिस व्यक्ति की ओर से नर्गिसी फूलों के गुच्छे को पकड़ा जाता है, उसे देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तीर्थन घाटी की शरची में भी पारंपरिक फागली पर्व धूमधाम से मनाया।