कुल्लू। नगर परिषद की राजनीति में अच्छी पकड़ रखने वाले नगर पिता के नाम से मशहूर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष गोपाल कृष्ण महंत को आखिरकार चुनावी मैदान छोड़ना पड़ा है। उन्होंने अपने के वार्ड आरक्षित होने के चलते वार्ड नंबर चार से नामांकन भरा था। वहीं, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रहे सेस राम चौधरी ने भी नाम वापस लेकर चुनावी मैदान छोड़ दिया।
दोनों के मैदान से हटते ही कांग्रेस पार्टी ने भी पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी की है। दोनों दिग्गजों के मैदान छोड़ने से राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। चर्चा है कि गोपाल कृष्ण महंत को संगठन का भी साथ नहीं मिल पाया है, जबकि गोपाल कृष्ण महंत इससे पहले दो बार नगर परिषद के अध्यक्ष और तीन बार उपाध्यक्ष और एक बार पार्षद के रूप में नगर परिषद में राजनीतिक दखल दे चुके हैं।
ऐसे में कुल्लू शहर में उनकी अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है और वह तीन से चार दशक तक किंग बनने के साथ किंग मेकर की भूमिका में रह चुके हैं लेकिन राजनीति के कॅरिअर में यह पहला मौका है, जब उन्हें चुनाव लड़ने से पहले मैदान छोड़कर जाना पड़ रहा है।
तीन में से एक भी सीट नहीं मिली
नगर परिषद के 11 वार्ड में से 1, 2 और 4 नंबर वार्ड अनारक्षित है, जिसमें से गोपाल कृष्ण महंत ने अपने लिए चार नंबर वार्ड को चुना था और अपना नामांकन पत्र भी दाखिल किया था लेकिन कांग्रेस ने यहां से पार्टी समर्थित दिग्विजय मोदगिल पर भरोसा जताकर उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। दिग्विजय मोदगिल इससे पहले दो बार चार नंबर वार्ड से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन एक भी बार जीत दर्ज नहीं कर पाए यह उनका तीसरा चुनाव है। अब देखना यह है कि इस बार उनका क्या परिणाम रहता है।
अब क्या होगी महंत की भूमिका
राजनीतिक जानकारों की माने तो अब देखना यह काफी दिलचस्प होगा कि गोपाल महंत के मैदान से हटने के बाद नगर परिषद की राजनीति में क्या भूमिका रहती है, जबकि उनकी भतीजी अमीना राज गौर भी 11 नंबर वार्ड से नौ नंबर वार्ड में चुनाव लड़ने के लिए उतरी है लेकिन उन्हें भी कांग्रेस की ओर से समर्थन नहीं मिला है। हालांकि अमीना मैदान में डटी हुई हैं, जिससे अब गोपाल कृष्ण महंत की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।