बंजार में सांझी विरासत विषय पर बठाहड़ में तीन दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में भाग लेते हुए।-संवा
बंजार (कुल्लू)। तीर्थन घाटी के बठाहड में सांझी विरासत विषय पर कार्यशाला हुई। तीन दिवसीय कार्यशाला में 30 प्रतिभागियों ने सांझी विरासत को चिह्नित किया और उसकी उपयोगिता भी समझी। आईएसडी संगठन दिल्ली के फील्ड कोऑर्डिनेटर तेज सिंह ठाकुर ने कहा कि सांझी मतलब सबकी और विरासतें जो हमें समाज का हिस्सा होने के नाते पीढ़ी दर पीढ़ी मिल रही है।
उन्होंने कहा कि यहां की संस्कृति, बोली भाषा, खानपान, पहनावा, हस्तशिल्प, खेती किसानी, लोकगीत, लोक नृत्य, प्राकृतिक संसाधन, जैव विविधता, अनूठी देव परंपराएं और रीति-रिवाज हमें एक सांझी विरासत के रूप में मिले हैं। इनमें से कुछ विरासतें अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है।
तेज सिंह ने कहा कि कुछ नकारात्मक विरासतें समाज को तोड़ने का काम करती हैं, जिसमें छुआछूत भी एक है। समाज में अच्छी परंपराओं को बढ़ावा देना चाहिए, जबकि गलत परंपरा का विरोध करना चाहिए। पूर्ण चंद, मोहर सिंह और सुरिता ठाकुर ने कहा कि सांझी विरासतों को तोड़ने वाले कारकों और शक्तियों पर भी मंथन किया गया।
स्थानीय निवासी मोहर सिंह ठाकुर ने सामाजिक कुरीतियों बाल विवाह, महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियां पर सुझाव और विचार रखे। प्रतिभागियों ने समूह चर्चा के माध्यम से तनाव और टकराव को रोकने के लिए सांझी विरासत से विभिन्न पहलुओं पर निष्कर्ष निकालने की कोशिश की।