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Kullu News: माइनस तापमान में तपेंगे सुनहरे सपने

Thu, 08 Jan 2026 10:49 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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केलांग के पेलचीमद में दस दिवसीय आइस हॉकी प्रशिक्षण शिविर में पहुंचे युवा।-संवाद
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आइस हॉकी के बहाने छोटी उम्र में ऊंची उड़ान भरने की ख्वाहिश
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उत्साह इतना कि शीतलहर के बीच सुबह 10 बजे पहुंच गए थे बच्चे
शाम चार बजे तक छह घंटे में बहाया खूब पसीना


अशोक राणा

केलांग (लाहौल-स्पीति)। समुद्रतल से करीब 11,000 फीट की ऊंचाई पर माइनस तापमान में तपकर जनजातीय क्षेत्र के बच्चे और युवा अपने सुनहरे भविष्य की इबारत लिखने को तैयार हैं।
कड़ाके की ठंड में जहां पानी तक जम जाता है और जनजीवन ठहर सा गया है, वहीं यही ठंड और ठोस बर्फ अब युवाओं के सपनों को पंख देने का जरिया बन रही है। अगर मेहनत, जज्बा और हौसला इसी तरह कायम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब लाहौल-स्पीति के यही बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।
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जिला मुख्यालय केलांग के समीप पेल चीमद में वीरवार से शुरू हुए दस दिवसीय आईस हॉकी प्रशिक्षण शिविर में करीब 70 बच्चों ने भागीदारी दर्ज कराई है। सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुए शिविर को लेकर प्रतिभागी बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इसके लिए बच्चे शीतलहर के बीच सुबह 10 बजे ही पहुंचना शुरू हो गए थे। कुल्लू-मनाली व अन्य जगहों पर शिक्षा ग्रहण कर रहे लाहौल के बच्चों में आईस हॉकी के बहाने छोटी उम्र में ऊंची उड़ान भरने की ख्वाहिश है। शिविर में तीन साल से 22 वर्ष तक के प्रतिभागियों ने पहले दिन माइनस तापमान के बीच शाम 4 बजे तक आइस हॉकी के गुर सीखे। करीब छह घंटे तक सर्द हवाओं के बीच खूब पसीना बहाया।
प्रशिक्षण के दौरान अगर बच्चों ने खेल की बारीकियों को गंभीरता से आत्मसात किया तो आने वाले वर्षों में यही खिलाड़ी आईस हॉकी में देश का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे।
दरअसल, आईस हॉकी लाहौल-स्पीति के बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय पटल तक पहुंचने का बड़ा अवसर प्रदान करती है। यहां हर क्षेत्र में कम खर्च में आइस हॉकी रिंक तैयार हो जाते हैं। स्पीति उपमंडल के कई खिलाड़ी पहले ही भारतीय आईस हॉकी टीम में जगह बना चुके हैं। ठंड और बर्फ से यहां के बच्चों का स्वाभाविक रिश्ता है जिससे वे आईस हॉकी में अपेक्षाकृत जल्दी पारंगत हो जाते हैं।
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हिमाचल महिला आइस हॉकी टीम की प्रबंधक एवं कोच केसंग देकिद का कहना है कि क्रिकेट और फुटबाल जैसे खेलों की तुलना में आईस हॉकी जनजातीय क्षेत्र के बच्चों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का बेहतर अवसर दे सकती है। लिहाजा बच्चों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारतीय आईस हॉकी टीम में 50 प्रतिशत से अधिक खिलाड़ी लाहौल-स्पीति से होंगे।

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